album cover
Sometimes, Sometimes
3780
World
Sometimes, Sometimes è stato pubblicato il 1 gennaio 2001 da ExWorks come parte dell'album Sound Tracks For Your Life
album cover
Data di uscita1 gennaio 2001
EtichettaExWorks
LinguaHindi
Melodicità
Acousticità
Valence
Ballabilità
Energia
BPM88

Crediti

PERFORMING ARTISTS
Bally Sagoo
Bally Sagoo
Performer
COMPOSITION & LYRICS
Baljit Singh Sagoo
Baljit Singh Sagoo
Composer
PRODUCTION & ENGINEERING
Bally Sagoo
Bally Sagoo
Mixing Engineer
John Matarazzo
John Matarazzo
Producer

Testi

कभी-कभी मेरे दिल में ख़याल आता है
कि ज़िंदगी तेरी ज़ुल्फ़ों की नर्म छाँव में गुज़रने पाती तो शादाब हो भी सकती थी
ये रंज-ओ-ग़म की स्याही जो दिल पे छाई है
तेरी नज़र की शुआओं में खो भी सकती थी
मगर यह हो न सका
मगर यह हो न सका और अब ये आलम है
कि तू नहीं, तेरा ग़म, तेरी जुस्तुजू भी नहीं
गुज़र रही है कुछ इस तरह ज़िंदगी जैसे
इसे किसी के सहारे की आरज़ू भी नहीं
न कोई राह, न मंज़िल, न रोशनी का सुराग़
भटक रही है अँधेरों में ज़िंदगी मेरी
इन्हीं अँधेरों में रह जाऊँगा कभी खो कर
मैं जानता हूँ, मेरी हम-नफ़स, मगर यूँ ही
कभी-कभी मेरे दिल में ख़याल आता है
कभी-कभी मेरे दिल में ख़याल आता है
कभी कभी...
कभी-कभी मेरे दिल में ये ख़याल आता है
कभी-कभी मेरे दिल में ख़याल आता है
कभी-कभी मेरे दिल में ख़याल आता है
कि जैसे तुझको बनाया गया है मेरे लिए
कि जैसे तुझको बनाया गया है मेरे लिए
तू अब से पहले सितारों में बस रही थी कहीं
तुझे ज़मीं पे बुलाया गया है मेरे लिए
तुझे ज़मीं पे बुलाया गया है मेरे लिए
(Oh, baby)
कभी कभी...
कभी-कभी मेरे दिल में ख़याल आता है
कभी-कभी मेरे दिल (baby, baby, baby) में ख़याल आता है (baby, baby, baby)
कभी-कभी मेरे दिल में ख़याल आता है
कि जैसे तू मुझे चाहेगी उम्र-भर यूँ ही
उठेगी मेरी तरफ़ प्यार की नज़र यूँ ही
मैं जानता हूँ कि तू ग़ैर है, मगर यूँ ही
मैं जानता हूँ कि तू ग़ैर है, मगर यूँ ही
कभी-कभी मेरे दिल में ख़याल आता है
तेरा हाथ, हाथ में हो अगर
तो सफ़र ही अस्ल-ए-हयात है
मेरे हर क़दम पे हैं मंज़िलें
तेरा प्यार 'गर मेरे साथ है
मेरी बात का, मेरी हम-नफ़स, तू जवाब दे कि ना दे मुझे
तेरी एक चुप्पी जो है छुपी, वो हज़ार बातों की बात है
तेरा हाथ, हाथ में हो अगर
कभी-कभी मेरे दिल में ख़याल आता है
कि जैसे बजती हैं शहनाइयाँ सी राहों में
सुहागरात है, घूँघट उठा रहा हूँ मैं
सिमट रही है तू शरमा के अपनी बाँहों में
सिमट रही है तू शरमा के अपनी बाँहों में
(कभी-कभी मेरे दिल में ख़याल आता है)
(कभी-कभी मेरे दिल में ख़याल आता है)
कभी-कभी...
कभी-कभी मेरे दिल में ख़याल आता है
कि ज़िंदगी तेरी ज़ुल्फ़ों की नर्म छाँव में गुज़रने पाती तो शादाब हो भी सकती थी
ये रंज-ओ-ग़म की स्याही जो दिल पे छाई है
तेरी नज़र की शुआओं में खो भी सकती थी
मगर यह हो न सका
मगर यह हो न सका और अब ये आलम है
कि तू नहीं, तेरा ग़म, तेरी जुस्तुजू भी नहीं
गुज़र रही है कुछ इस तरह ज़िंदगी जैसे
इसे किसी के सहारे की आरज़ू भी नहीं
न कोई राह, न मंज़िल, न रोशनी का सुराग़
भटक रही है अँधेरों में ज़िंदगी मेरी
इन्हीं अँधेरों में रह जाऊँगा कभी खो कर
मैं जानता हूँ, मेरी हम-नफ़स, मगर यूँ ही
कभी-कभी मेरे दिल में ख़याल आता है
कभी-कभी मेरे दिल में ख़याल आता है
Written by: Baljit Singh Sagoo
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