album cover
Kohra
5,220
On Tour
Hip-Hop
Kohra was released on May 27, 2022 by Azadi Records / The MVMNT as a part of the album Nayaab
album cover
AlbumNayaab
Release DateMay 27, 2022
LabelAzadi Records / The MVMNT
Melodicness
Acousticness
Valence
Danceability
Energy
BPM70

Lyrics

[Verse 1]
वापस लौट आया था जहाँ से (जहाँ से)
उसी राह पे फिर चल पड़ा
ऐ ज़ालिम हसीना
मैं बस तेरे गुम गिन रहा
क्या वाक़ई में हल है
या बस ज़ाया वक्त कर रहा
या मैं पक्का सही हूं
या मैं सही में अंधा हो चुका हु
[Verse 2]
हम सब हैं एक लत में
और किसी को कुछ समझ नहीं आता
बस बच रहे है दर्द से
और चल रहे है जब तक हो चल पाना
तू आसमान की पंछी है पानी में
और तैरना नहीं आता
तो इसमें तेरी क्या गलती
[Verse 3]
दिल पे चोट है
और सर पे बहुत है
पर लड़के सॉर्ट है
बस चाहते मोक्ष है
मैं कबसे
लिख लिख दर्द दूर दूर कर फूट फूट रोया
बूंद बूंद जमा खून खून खौला
कमी महसूस हुई खूब मेरे खून की बस
पर यहा भी धुंधली छत्त
और कटता है चूतिया सबका
[Verse 4]
अब याद नी वो दिन जब मैं दर्द और इस दूरी को
देता था शुनिया फ़क्स हा
इन सपनों के नशों में अंधा
था भूला कुछ ज़रूरी बंदा
राहीस पर प्यार से कंगाल
[Verse 5]
लोग पूछते है के दर्द क्यूं लिखता है
क्यूंकि दर्द बात ता हूँ तो दर्द कम्म लगता है
मेरमे नहीं है ईगो तो झूठ नहीं लिखता मैं
तुमसे बात करता हु तो दिल भर उठता है
[Verse 6]
पापों का भर चुका घड़ा
बस लिखता हु बड़ा
पर नहीं हु हालातो से बड़ा
मैं नहीं हूं
मैं नहीं हूं इन रातों से बड़ा
इन सांसो जज़्बातो से बड़ा जो निर्भर है मुझपे
तो पैरों पे खड़ा हूं खुदके
इन पैरों पे खड़ा हूं खुदसे
अब देखु ना कभी भी मुड़के
तो चाहे और जितना भी लुड़के
[Verse 7]
छाती में धुआं गज़ब है
तो भी मैं कहीं ता जाऊ
भेजे में कोहरा बहुत है
कैसे ये धुंध उठाऊ
सही इरादे और भूल चूक
दोनों ही भूल सा रहा हु
भेजे में कोहरा बहुत है
[Verse 8]
यहां हो चुके आँखों से अंधे
बस मुझे देखते जाओ
कैसे लगाके मुखौटा
मैं रोते हुआ मुस्कुराऊ
छोटे भी देते नी साथ है
मैं सही में थक्क चुका हु
फँस चुका हूं
मर सा रहा हूं
डर रहा हु
[Verse 9]
हमेशा से मोटो था एक ही कि गो वर्क
ज़िंदगी ले क्लास
वर्सेस है होम वर्क
वर्सस उन लोगो के जो रखे दो मुह यहां पे है दो सर
Oh yeah
थोड़े से वोके और थोड़े से लोफर
थोड़ा से लोग और दिये है खो
पर अब होता है नो दर्द
[Verse 10]
छाती में धुआं गज़ब है
तो भी मैं खींचता जाऊँ
और कब तक दब के जियु ये छल कपट सी ज़िंदगी
मैं कल सफल नि हुआ तो शर्म से मर ना जाऊ
ये लत्त कमीनी कप कपी जो हुई थी कम्म वो झट से वापस आई फिर मैं भी
[Verse 11]
वापस लौट आया था जहाँ से
उसी राह पे फिर चल पड़ा
ऐ ज़ालिम हसीना
मैं बस तेरे गुम गिन रहा हूं
क्या वाक़ई में हल है
या बस ज़ाया वक्त कर रहा
या मैं पक्का सही हूं
या मैं सही में अंधा हो चुका हु
[Verse 12]
सेज़ ऑन द बीट बॉय
Written by: Abhijay Negi, Sajeel Kapoor, Siddhant Sharma
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