album cover
MENTAL STATE
2,950
Hip-Hop/Rap
MENTAL STATE was released on December 15, 2024 by SADAKAT as a part of the album MENTAL STATE - Single
album cover
Release DateDecember 15, 2024
LabelSADAKAT
Melodicness
Acousticness
Valence
Danceability
Energy
BPM84

Credits

PERFORMING ARTISTS
SADAKAT ALI
SADAKAT ALI
Vocals
SADAKAT
SADAKAT
Vocals
COMPOSITION & LYRICS
SADAKAT ALI
SADAKAT ALI
Composer
PRODUCTION & ENGINEERING
SADAKAT
SADAKAT
Producer
pankajbeatz
pankajbeatz
Producer

Lyrics

लिखता हूं मैं पन्नो में कोई असलियत में सुनता नहीं
आसान होती ज़िंदगी तोह नशो को मैं छुता नहीं
आसानी से मैं बोल देता मैं तोह एक दम ठीक हूं मैं
असल में क्या चल रहा है ये ख़ुद ही ख़ुदको पता नहीं
अंधेरा मेरी ज़िंदगी में बढ़ता जा रहा है
ज़िम्मेदारियों के तले लड़के धस्ता जा रहा है
कफन मांगे लड़का तुम अब कफन लाकर देदो
वो तोह थक चुका है जीकर अब वो मरता जा रहा है
आसान केसी ज़िंदगी जब खुशी का ठिकाना नहीं है
खुशी मिलती पैसों से तोह पैसा भी कमाना नहीं है
कैसा है ये पेसा जब गरीब को निवाला नहीं है
पैसो को तुम रखो मुझे हक किसी का खाना नहीं है
मेंटल हेल्थ ही ठीक नहीं है बोलू किसको बातें सारी
धोके मिले रिश्तों में तोह खाती उनकी यादें सारी
टूटा हूं मैं रिश्तों में तोह बात मुझे समझ आरी
कोई किसका सगा नहीं है माँ ही होती सबसे प्यारी
देखा मेने लोगो को और देखी मेने दुनियादारी
लड़का हूं मैं घर तोह फिर सिर पर मेरे ज़िम्मेदारी
बकता हूँ मैं आकर तोह तुम कहते इसको कलाकारी
बोलना तुम मुझे और मैं कितनी करु अदाकारी
दिल मेरा टूटा तोह फिर तोड़े सारे रिश्ते भी
कल तक मेरे साथ थी अब साथ मेरे दिखती नी
मांगा मेने प्यार था और तूने जाना भीख देदी
कैसी होती औरतें ये तूने मुझे सीख देदी
डर चुका पूरा जाना मैं तोह तेरे बाद से
उमर मेरी छोटी थी पर देखे काफी हादसे
कैसी ये इंसानियत और कैसे इनके रबते
जब खतरा है इंसान को ही महज़ एक इंसान से
एक सुनसान सी शाम आती है
जाने क्या साथ लाती है
मेरी तरह इसका दिल दुखा है शायद
जब भी आती है उदास ही आती है
शुक्रिया है खुदा तूने देदी कला हाथ में
वो आए कभी नजर नहीं जो कहते मेरे साथ थे
इस ज़िंदगी में चाहत नहीं अब ज़िंदगी को जीने की
मार डाला वक्त ने बचपन के जो भी ख्वाब थे
20 साल उमर मेरी ज़िंदगी तमाशा लगे
माँ को छोड़ा सताने फिर ख़ुदको ही सताने लगे
बचपन ऐसा गया कि अब गमों को छुपाने लगे
रोलेता हूँ तन्हा ताकि माँ को भी पता ना लगे
कोई मेरा सगा नहीं ये बात मैं नहीं जानता था
जो भी मिले प्यार से मैं उसको अपना मानता था
जिसको बोला भाई वो तोह भाई बस एक नाम का था
मेंटली मैं स्टेबल नहीं और जिस्म मेरा काँपता था
रातें तुमने देखी नहीं जिन रातों को मैं जगता था
बातें तुमने सुनी नहीं जिन बातों से मैं भागता था
देखे मुझे खुशी में ये ख्वाब मेरी माँ का था
टूटा था वो ख्वाब जब मैं नसें अपनी काटरा था
खुशी नहीं नसीब में माँ गमो को मैं बाँटता है
कैसे देखु ख़ुदको जब ना शीशे से कोई वास्ता है
चला हूं मैं सफर और मुश्किल बड़ा रस्ता है
लड़का तब भी काँपता था लड़का अब भी काँपता है
कौन मुझे देखता
कौन मुझे पूछता
कोई नहीं कोई नहीं
Written by: SADAKAT ALI
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