album cover
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Dashavtar wurde am 6. September 2026 von Hrutul als Teil des Albums YOUFORIA chp. Kaliyudh veröffentlicht
6. September 2026
LabelHrutul
SpracheHindi
BPM
Melodizität
Akustizität
Valence
Tanzbarkeit
Energie

Musikvideo

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Songtexte

यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत।
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्।।
परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम।
धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे।।
चार युग एक ही युद्ध
अनंत स्वरूप एक ही युद्ध।
चार युग एक ही युद्ध
अनंत स्वरूप एक ही युद्ध।
वेदों की वाणी से समुद्र का प्रकोप जब भिड़ा।
मत्स्य और मनु के संवाद ने सुनहरा कल्प रचा
मन्दर पर्वत के संग अमृत की चाह जब डूबी।
कूर्मा के रूप में उम्मीद की लहर तब उठी।
चार युग एक ही युद्ध
अनंत स्वरूप एक ही युद्ध।
चार युग एक ही युद्ध
अनंत स्वरूप एक ही युद्ध।
हिरण्याक्ष ने धरती को पाताल में फेंका
तीसरे अवतार का प्रहार सारी सृष्टि ने देखा।
दाँतो पे सजाया भूदेवी को बचाया।
दहाड़ से अपनी चौदह लोक को हिलाया।
पर वराह के वार ने वीरा का क्रोध
ललकारा, ललकारा, ललकारा।
हिरण्यकश्यपू का प्रतिशोध बना
अंगारा,अंगारा,अंगारा।
एक घोर घना तप कर
गहरा घमंड कर
वर्दान का मोह कर
महा ब्रह्म को
पुकारा,पुकारा,पुकारा।
ना नर से, ना पशु से,
ना शस्त्र के प्रहार से।
ना धरती, ना आकाश में,
ना दिन में, ना रात में।
ना नर से, ना पशु से,
ना शस्त्र के प्रहार से।
ना धरती, ना आकाश में,
ना दिन में, ना रात में।
वध मेरा ना हो।
नर नर नर नरसिंह
नर नर नर नरसिंह
नर नर नर नरसिंह
नर नर नर नरसिंह।
नर नर नर नरसिंह
नर नर नर नरसिंह
नर नर नर नरसिंह
नर नर नर नरसिंह।
वरदान निभाया, वध कर मिटाया
प्रह्लाद को प्रेम से सहलाया!
चार युग एक ही युद्ध
अनंत स्वरूप एक ही युद्ध।
चार युग एक ही युद्ध
अनंत स्वरूप एक ही युद्ध।
एक ब्रह्मचारी बालक ने बलि का भ्रम यूं तोड़ा।
बस तीन कदमों के वचन से तीनों लोकों को तोला।
सत्ता का षड्यंत्र जब क्षत्रियों ने था रचा।
रक्षकों के भेस में भक्षकों का खेल था खेला।
प्रहार परशु का
प्रहार परशु का
प्रहार परशु का
रामा।
प्रहार परशु का
प्रहार परशु का
प्रहार परशु का
रामा।
भक्षकों के रक्त से महलों के तख्त को सजाया।
फिर युग बदला।
युद्ध का रूप बदला।
शस्त्रों का बल अटल
शास्त्रों का फल अचल
राम का भी रूप बदला।
सही है कौन गलत है कौन
तय अब करेगा कौन?
ज्ञान के घमंड से
शिव के परम भक्त से
लड़ेगा कौन? लड़ेगा कौन?
ॐ ह्रीं काल चक्राय नमः॥
युग बदला।
युद्ध का रूप बदला।
युग बदला।
युद्ध का रूप बदला।
युग बदला।
युद्ध का रूप बदला।
युग बदला।
युद्ध का रूप बदला।
ना चुना था मैंने ये युद्ध,
न चुना था मैंने यह वनवास,
मर्यादा बुनी और परीक्षा चुनी,
मेरी जंग थी मेरे अंदर।
ना रचाया कोई षड्यंत्र,
हां निभाए सारे कर्तव्य,
बस मांगा था अपनों का साथ और चैन सुख सबका।
मेरा नियंत्रण ही युद्ध मेरा, अग्निपरीक्षा
है संयम ही सुख मेरा।
मेरी प्रतीक्षा।
ॐ ह्रीं काल चक्राय नमः॥
युग बदला। युद्ध का रूप बदला।
युग बदला। युद्ध का रूप बदला।
युग बदला। युद्ध का रूप बदला।
युग बदला। युद्ध का रूप बदला।
केशव माधव
गोविंदा गोविंदा
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गोविंदा गोविंदा
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गोविंदा गोविंदा
हरि हरि हरि हरि
गोविंद गोविंदा
लीला का लय रचा
गोविंदा गोविंदा
कंस का क्रोध सहा
गोविंदा गोविंदा
वज्र का वार सहा
गोविंदा गोविंदा
हरि हरि हरि हरि
गोविंद गोविंदा
गीता का ज्ञान रचा
गोविंदा गोविंदा
सारथी बन वार करा
गोविंदा गोविंदा
कौरवों का नाश करा
गोविंदा गोविंदा
हरि हरि हरि हरि
गोविंदा गोविंदा।
धर्म का अधर्म से
सत्य का मिथ्या से
देवों का दानव से
एक ही युद्ध।
Written by: Darshan Shah, Hrutul Patel, Tirth Thakkar
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