album cover
Khamoshi
1280
Alternative Rap
Khamoshi fue publicado el 13 de febrero de 2022 por Kala Kranti Media como parte del álbum Khamoshi - Single
album cover
Fecha de lanzamiento13 de febrero de 2022
SelloKala Kranti Media
LanguageHindi
Melodicidad
Acústico
Valence
Bailabilidad
Energía
BPM85

Créditos

PERFORMING ARTISTS
Munawar Faruqui
Munawar Faruqui
Lead Vocals
Farhan Wasiulla Khan
Farhan Wasiulla Khan
Lead Vocals
COMPOSITION & LYRICS
Munawar Faruqui
Munawar Faruqui
Songwriter
Farhan Wasiulla Khan
Farhan Wasiulla Khan
Songwriter
PRODUCTION & ENGINEERING
DRJ Sohail
DRJ Sohail
Producer

Letras

[Verse 1]
कुछ तोह तू भी कहदे
खामोशी तेरी आती है तूफ़ान लेके
कश्ती को किनारे दे
डूबा दे या फिर तू मुझे तेरी पनाह में लेके
[Verse 2]
जो लौटेगी तोह इंतज़ार देदे
रातें कट ती नहीं ये दिन भी इम्तेहान लेते
मेरे हाले दिल की तुझे ज़िम्मेदार कहते
ये बेखबर मैं ज़िंदा हूँ तेरी ही आसरे पे
[Verse 3]
फ़सलों से ये मोहब्बत कभी कम ना होगी
लूटा दूँ ख़ुदको वादों पे तोह फिर कसर क्या होगी
असर ना होगी कोई दवा भी मुझ दीवाने पे
गवाह हैं रातें तेरे बिन जो अब बशर ना होगी
[Verse 4]
बारिशों में अब मैं झूमूँ कैसे
बसा तू आँखों में तोह आँखों को मैं चूमू कैसे
हाथ काँपे मेरे छूलू कैसे
सबक जो सीखे तुझसे उनको अब मैं भूलु कैसे
[Verse 5]
जलते है आशिक़ जब जाके बनता है काजल तेरा
दिल ये दफन कफन बना लिया है आँचल तेरा
रोता है बादल रूठा बैठा मुझसे सावन मेरा
ज़ुल्फ़ों को छूना चाहता फिरसे तेरी पागल केहरा
[Verse 6]
तू बहती नदी सी हूं रुका हुआ मैं
है तू मुकम्मल सी और टूटा हुआ मैं
ना तेरे आगे कोई वजूद है मेरा
खज़ाने सी है तू लूटा हुआ मैं
वो ग़म भुलानेको देते शराब खोल के
पर पीना तेरे हाथसे तू दे ज़हर को घोल के
क्यूं हिचकिया क्यूं यादे क्यूं चेहरा ना भूल पाते
मुझे दे निजात ऐसे मेरी रूह जिस्म को छोड़ दे
करवटों का हिसाब करके बैठा
मैं राज़दार राज़ तेरे हूं छुपा के रहता
ना ग़र्ज़ है मुझे किसी की परछाई की
मैं बाद तेरे ख़ुद के सायों से जुदा हूं रहता कुछ तोह कहजा
[Verse 7]
कुछ तोह तू भी कहदे
खामोशी तेरी आती है तूफ़ान लेके
कश्ती को किनारे दे
डूबा दे या फिर तू मुझे तेरी पनाह में लेके
[Verse 8]
जो लौटेगी तोह इंतज़ार देदे
रातें कट ती नहीं दिन भी इम्तिहान लेते
मेरे हाले दिल की तुझे ज़िम्मेदार कहते
ये बेखबर मैं ज़िंदा हूँ तेरी ही आसरे पे
[Verse 9]
अब सीने में साँसें कम आँखें नम माहौल उदासी का
लगाया गले बांहें तेरी बनी फंदा फांसी का
मोहब्बत मेरी पाकीज़ा करदी तुझपे थी जान निसार
फिर दफन किया तूने खड़ी करके बीच में ये दीवार
[Verse 10]
दे दे दीदार मैं हूं तरसा बैठा
मैं बंदा तेरा खुदा मुझसे अब ये पर्दा कैसा
मुनाफा छोड़ मोहब्बत का मुझे कर्ज़ा देजा
मैं कर्ज़ा लेके तुझसे तेरा ही हूं सदका देता
हवाएँ जानती हैं साँसें तेरे नाम की
लौटेगा तू ज़रूर तभी साँसें अपनी थाम ली
चेहरा नूरानी अफरीन हट ती तुझसे थी आंख नहीं
अंधेरा चारों ओर ज़िंदगी में जो तू पास नहीं है
[Verse 11]
किताबों से बातें करु मैं तेरा नाम लेके
बदलें में आते ना कुछ जवाब लिखे वे पन्ने फिर फाड़ देते
आसान ना इश्क अब ये सब मेरी मिसाल देते
दरिया तू मैं डूबा तू आँखों में घूमें आग लेके
तू मेरे लफ्जो में बसी जैसे कि शायरी
तू मेरी थी बस पहले किसी महफ़िल में ना गाई गई
पर अब तू है ज़माने की तोह लिख के अब क्या फ़ायदा
हर ज़ुबान पे तू तुझसे अब शुरू है हर मुशायरा
अब तेरी गुल्लियों में ठिकाना कर लिया
पर तूने जाके यहांसे गुल्लियों को वीराना कर दिया है
आँखों से मोती का खज़ाना भर लिया
तुझे पैमाने से दीवाने ने मैखाना कर दिया है
[Verse 12]
कुछ तोह तू भी कहदे
खामोशी तेरी आती है तूफ़ान लेके
कश्ती को किनारे दे
डूबा दे या फिर तू मुझे तेरी पनाह में लेके
[Verse 13]
जो लौटेगी तोह इंतज़ार देदे
रातें कट ती नहीं दिन भी इम्तिहान लेते
ये मेरे हाले दिल की तुझे ज़िम्मेदार कहते
ये बेखबर मैं ज़िंदा हूँ तेरी ही आसरे पे
Written by: Farhan Wasiulla Khan, Munawar Faruqui
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