album cover
Nishu
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Nishu è stato pubblicato il 26 luglio 2022 da Kalamkaar come parte dell'album Nishu
AlbumNishu
26 luglio 2022
EtichettaKalamkaar
LinguaHindi
BPM
Melodicità
Acousticità
Valence
Ballabilità
Energia

Video musicale

Video musicale

Testi

[Verse 1]
निशु
[Verse 2]
अंडा फटी खेला पले बढ़े
पतंगबाज़ जब भी छत पे चढ़े
साइकिल पे व्हीली से करतब करे
दुकान पे चोरी के किस्से बड़े
मिंटू की सेगा में सोनिक चले
स्वात कैट्स साढ़े चार बजे
रैंक वन मेरे पत्ते बड़े
बचपन से जीते ना क्लैश करे
बाप शराबी बेटा आवारा
सबकी नज़रों में मैं अव्वाल नकारा
ट्यूशन के टीचर को ऑफिस का गुस्सा
बर्थडे पे मेरे फट्टे से मारा
[Verse 3]
मैं बचपन से पिसा बचपन से गुस्सा भरा
ऐसे हालातों में सुना था शैडी
इंस्पायर्ड हुआ मैं रैपर बना
निशु निशु निशु निशु
नाम मेरा सुन निशु
हरी हरी पत्ती पिसुन
बचपन से ही कुट्टी चीज़ हूं
निशु निशु निशु निशु
नाम मेरा सुन निशु
हरी हरी पत्ती पिसुन
बचपन से ही कुट्टी चीज़ हूं
[Verse 4]
संचित की छत पे फूँकी है सिग्गी
मैं फैन एमीनेम का इसका था 50
मेरी दो इसने कैसेट तपाई
पहली थी 50 की दूसरी भी 50 की
50 की टी ब्लू बैगी जीन
सिर पे थी स्टार्टर एक नकली नाइके
एक स्कूल की बंदियां दोनों भाई की
पहली चिलम हमने साथ में पी
था खून गरम ना किसी का डर
हुई खाई पी में हाफ मर्डर
खून था टिम्बरलैंड्स के उपर
गुनाह करके भागे थी बड़ी खबर
मैंने गोलू को फोन मिलाया
हाँफते उससे बताया
भाई मैं कलेश कर आया
गोलू ने आते ही चंटा लगाया
और गुस्से में बोला
हो जाएगा खाक तेरे सपनों का घर
अभी भी वक्त जा तू संभाल
बैसाखी ना बने कलम
ठीक तू करले करम और मंगा वचन
[Verse 5]
मैं बचपन से पिस्सा
बचपन से गुस्सा भरा
ऐसे हालातों में सुना था शैडी
इंस्पायर्ड हुआ मैं रैपर बना
निशु निशु निशु निशु
नाम मेरा सुन निशु
हरी हरी पत्ती पिसुन
बचपन से ही कुट्टी चीज़ हूं
निशु निशु निशु निशु
नाम मेरा सुन निशु
हरी हरी पत्ती पिसुन
बचपन से ही कुट्टी चीज़ हूं
[Verse 6]
बचपन में पैसे थे कम
ख्वाहिश थी ज़्यादा
बापू ने किया जितना कर पाता
खिलोने की ज़िद सोया मैं तब
जब दादी ने करा दिलाने का वादा
गर्मी की छुट्टी दसवीं की बात
साउथ दिल्ली में जॉब अच्छे से याद
पैसा कमाना था लेना था पीएस
मैं जा रहा था घर जब आई वो रात
लौंडे खड़े थे कुछ टोली में
सनक सी थी उनकी बोली में
उन सबने घेरा मुझे और पूछा
के नया क्या हूं में कॉलोनी में
बातों बातों में मेरी जेब पे हाथ मारा
छीना मोबाइल गाली था वह बके जा रहा
हाथ फेरा उसने ब्लेड उसके हाथ में
कान पे लगा खुली खाल खून बहे जा रहा
बेताशा
भाग रहा था मैं सड़क पे
रोक रहा गाड़ियाँ चोट की मैं तड़प में
होने लगा धुंधला सब चारों तरफ़ से
पास से हूं मिला दिल्ली नाम की नरक से
[Verse 7]
मैं बचपन से पिस्सा
बचपन से गुस्सा भरा
ऐसे हालातों में सुना था शैडी
इंस्पायर्ड हुआ मैं रैपर बना
निशु निशु निशु निशु
नाम मेरा सुन निशु
हरी हरी पत्ती पिसुन
बचपन से ही कुट्टी चीज़ हूं
निशु निशु निशु निशु
नाम मेरा सुन निशु
हरी हरी पत्ती पिसुन
बचपन से ही कुट्टी चीज़ हूं
[Verse 8]
निशु
Written by: Ikka
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