album cover
Gulaab
album cover
Gulaab è stato pubblicato il 13 marzo 2025 da Suryansh Chauhan come parte dell'album Gulaab - Single
13 marzo 2025
EtichettaSuryansh Chauhan
LinguaHindi
BPM
Melodicità
Acousticità
Valence
Ballabilità
Energia

Testi

घर उनका था सामने झांकते
दिखते नहीं अब तोह वो हाल फ़िलहाल में
मिलते तोह दोनों गुलाब
वो फूलों की खुशबू, हम रस्ते के कांटे
छुप छुप के दूर से पास थे
चुप चुप संग नूर के नाचते
ढलती जो सांझ घर भागते पर
मुड़ मुड़ के दोनो ही ताकते
बोलो कि ग़म क्यों सजाते हैं
मोहब्बत गुनाह क्यों बताते हैं
जन्नत में जाने के वास्ते
जीते जी ज़िंदगी नरक बनाते हैं
लड़वाते तोह पंडित बन जाते हैं
मर जाते तोह आशिक़ बताते हैं
फ़ितरत ना मेल पर कुदरत का खेल के
फोटो पे दोनों की माला चढ़ाते हैं
छोड़ गया वो, रूठा ये ज़माना पीछे
तोड़ गया वो, सब ज़ंग खाई ज़ंजीरें
राज़ अदा वो होगा अंत में
मिलना हैं कहां हम तुम को
बोल गया वो, एक कल मलंग मस्ती में
जंग बेहिसाब थी, उनके हिसाबों से
नज़रे नाराज़ थी अपने नज़ारो से
बुलबुल बेखौफ़ गुज़रती बाज़ारों से
हाथों में हाथ, ना लड़ती गंवारों से
घर की वो लाज पर आती ना बाज़
कटवाती है नाक, उछाले है दाग
जो नाम पे पूरी अवाम के
वो मा बोली बेटा संभाल के
ये भूखा समाज, खा जाएगा मास
उधाड़ के प्यार कर जाएगा राख
तू बढ़ते इन कदमों को थाम दे
रसोई देख, राम का नाम ले
वह श्याम की राधा थी
सबको ही बाधा थी
उसकी मोहब्बत से तोह छीनी आज़ादी
कर डाला कमरे में कैद तोह
वो बोली ओ ले चल विलायत को
सुनती हूं कहानी
परियों की सयानी
उड़ती है खुली हवा में
दम घुटता नहीं
औरत का दरजा समान है
फ़रेब ना झूठा सम्मान है
तू अगले जनम
मैं ना मिलना सनम
मैं करना ना चाहूँ
घर वालों को तंग
तू अम्मी की तबियत पे ध्यान दे
ये अपना बस आखिरी दीदार है
छोड़ गया वो, रूठा ये ज़माना पीछे
तोड़ गया वो, सब ज़ंग खाई ज़ंजीरें
आसमान में होगा भटकता
बाग़ियों की खोज में बस
ओढ़ गया वो है चादर हल्की सर्दी में
Written by: Suryansh Chauhan
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