album cover
Main Pardesi Hoon
9,476
Devotional & Spiritual
Main Pardesi Hoon was released on November 23, 1998 by T-Series as a part of the album Maiya Rani
album cover
Release DateNovember 23, 1998
LabelT-Series
LanguageHindi
Melodicness
Acousticness
Valence
Danceability
Energy
BPM86

Credits

PERFORMING ARTISTS
Anuradha Paudwal
Anuradha Paudwal
Performer
Udit Narayan
Udit Narayan
Performer
COMPOSITION & LYRICS
Anand Raj Anand
Anand Raj Anand
Composer
Saral Kavi
Saral Kavi
Lyrics

Lyrics

हो, मैं परदेसी हूँ, पहली बार आया हूँ
मैं परदेसी हूँ, पहली बार आया हूँ
दर्शन करने मैया के दरबार आया हूँ
पहली बार आया हूँ, पहली बार आया हूँ
मैं परदेसी हूँ, पहली बार आया हूँ
ऐ, लाल चुनरिया वाली बेटी, ये तो बताओ
माँ के भवन जाने का रास्ता किधर से है?
इधर से है या उधर से है?
सुन रे, भक्त परदेसी, इतनी जल्दी है कैसी?
अरे, ज़रा घूम लो, फिर लो, रौनक देखो कटरा की
जाओ, तुम वहाँ जाओ, पहले पर्ची कटाओ
ध्यान मैया का धरो, एक जयकारा लगाओ
चली भक्तों की टोली, संग तुम मिल जाओ
तुम्हे रास्ता दिखा दूँ, मेरे पीछे चली आओ
ये है दर्शनी ड्योढ़ी, दर्शन पहला है ये
करो यात्रा शुरू तो "ਜੈ ਮਾਤਾ ਦੀ" कह
यहाँ तलक तो लाई, बेटी, आगे भी ले जाओ ना
के मैं परदेसी हूँ, पहली बार आया हूँ
दर्शन करने मैया के दरबार आया हूँ
इतना शीतल जल! ये कौन-सा स्थान है, बेटी?
ये है बाणगंगा, पानी अमृत समान
होता तन-मन पावन, करो यहाँ इस नाम
माथा मंदिर में टेको, करे आगे प्रस्थान
चरण पादुका वो आई, जाने महिमा जहान
मैया जग कल्याणी, माफ़ करना मेरी भूल
मैंने माथे पे लगाई तेरे चरणों की धूल
अरे, यहाँ तलक तो लाई, बेटी, आगे भी ले जाओ ना
मैं परदेसी हूँ, पहली बार आया हूँ
दर्शन करने मैया के दरबार आया हूँ
(ਤੂੰ ਪੌੜੀ-ਪੌੜੀ ਚੜ੍ਹਦਾ ਜਾ, ਭਗਤਾ)
("ਜੈ ਮਾਤਾ ਦੀ" ਕਰਦਾ ਜਾ, ਭਗਤਾ)
ये हम कहाँ आ पहुँचे! ये कौन-सी जगह है, बेटी?
ये है अर्धकुँवारी, महिमा है इसकी भारी
गर्वजून वो गुफा है, कथा है जिसकी न्यारी
भैरव यति एक जोगी, मास-मदिरा हारी
लेने माँ की परीक्षा, बात उसने विचारी
मास और मदमाँगी, मति उसकी थी मारी
हुई अंतर्ध्यान माता, आया पीछे दुराचारी
नौ महीने इसी में रही मैया अवतारी
इसी गुफा गर्वजून जाने दुनिया ये सारी
और गुफा से निकलकर माता वैष्णो रानी
ऊपर पावन गुफा में पिण्डी रूप में प्रकट हुई
धन्य-धन्य मेरी माता, धन्य तेरी शक्ति
मिलती पापों से मुक्ति करके तेरी भक्ति
अरे, यहाँ तलक तो लाई, बेटी, आगे भी ले जाओ ना
मैं परदेसी हूँ, पहली बार आया हूँ
दर्शन करने मैया के दरबार आया हूँ
ओ, मेरी मैया, इतनी कठिन चढ़ाई!
ये कौन-सा स्थान है, बेटी?
देखो, ऊँचे वो पहाड़ और गहरी खाई
ज़रा चढ़ना संभल के, हाथीमथी की चढ़ाई
टेढ़े-मेढ़े रस्ते हैं, पर डर ना, भाई
देखो, सामने, वो देखो, साँझीछत की दिखाई
परदेसी, यहाँ कुछ खा लो, पी लो, थोड़ा आराम कर लो
बस थोड़ी यात्रा और रह गई है
ऐसा लगता है मुझको, मुकाम आ गया
माता वैष्णो का निकट ही धाम आ गया
अरे, यहाँ तलक तो लाई, बेटी, आगे भी ले जाओ ना
मैं परदेसी हूँ, पहली बार आया हूँ
दर्शन करने मैया के दरबार आया हूँ
वाह! क्या सुंदर नज़ारा है
आख़िर हम माँ के भवन पहुँच ही गए ना
ये पावन गुफा किधर है, बेटी?
देखो, सामने गुफा है, मैया रानी का दुआरा
माता वैष्णो ने यहाँ रूप पिण्डियों का धारा
चलो, गंगा में नहा लो, थाली पूजा के सजा लो
लेके लाल-लाल चुन्नी अपने सर पे बँधवा लो
जाके सुंदर गुफा में माँ के दर्शन पा लो
बिन माँगे ही यहाँ से मन इच्छा-फल पा लो
गुफा से बाहर आकर कंचके बिठाते हैं
उनको हलवा, पूरी और दक्षिणा देकर आशीर्वाद पाते हैं
और लौटते समय भैरव दर्शन करने से ही यात्रा संपूर्ण मानी जाती है
आज तुमने Saral पे उपकार कर दिया
दामन खुशियों से, आनंद से भर दिया
भेज बुलावा अगले बरस भी परदेसी को बुलाओ माँ
हर साल आऊँगा जैसे इस बार आया हूँ
मैं परदेसी...
ओ, मैया, मैं परदेसी, परदेसी
मैं परदेसी हूँ, पहली बार आया हूँ
दर्शन करने मैया के दरबार आया हूँ
Written by: Anand Raj Anand, Saral Kavi
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