album cover
Umar 21
49
Hip-Hop/Rap
Umar 21 was released on November 29, 2021 by ARTEZALIVE DIGITAL SOLUTIONS LLP as a part of the album Umar 21 - Single
album cover
Release DateNovember 29, 2021
LabelARTEZALIVE DIGITAL SOLUTIONS LLP
LanguageHindi
Melodicness
Acousticness
Valence
Danceability
Energy
BPM89

Music Video

Music Video

Credits

PERFORMING ARTISTS
Katoptris
Katoptris
Performer
Prithvi Shetty
Prithvi Shetty
Performer
Mohak Kukreja
Mohak Kukreja
Performer
COMPOSITION & LYRICS
Mohak Kukreja
Mohak Kukreja
Songwriter
PRODUCTION & ENGINEERING
Katoptris
Katoptris
Producer
Prithvi Shetty
Prithvi Shetty
Producer

Lyrics

[Verse 1]
उमर इक्कीस
कल ही तोह तोह दस का था
कंधों पे ज़िम्मेदारी
कल इसपे बसता था
[Verse 2]
घंटी बजते ही भागे दौड़े सीधे भार सब
स्कूल से कॉलेज पुणे से देवनार तक
बचपन तोह बीता अपना दोस्ती यारी में
सफर में थोड़े बिछड़े थोड़े और बना लिए
पर एक बात है पक्की पहुंचना ख़ुद है मंज़िल पे
पर इसका क्या पता कि मंज़िल कहाँ पे
[Verse 3]
मैं गाता हु गाने बनाता हु करता हु रैप पर क्या है ये मेरे लिए
ये तोह सारी ऊपरवाले की देन
दिया उसने सब भर भर के
पन्नों को भरू मैं बैठ घर पे
शब्दों में बहूंगा पनघट ये
आज तोह जी लूंगा सब ठीक पर
कलको तोह खुदके है पेट भरने
[Verse 4]
परसों तोह सोने की थाली में खाया था खाना माँ की मीठी गाली के साथ
सालों से बैठा था छाओं में धूप के बिना है पोधा ये बन गया झाड़
बरसों से जिसने भी बात की पाला था पोसा था सबने ही प्यार परोसा
पड़ोसी भी ऐसे खानदान के जैसे पर आज मैं करूंगा किसपे भरोसा
[Verse 5]
जब से था पैदा ज़िंदगी है जी ये सेठ वाली
अमावस्या में भी ना थी अपनी रातें काली
अब रहस्य है सुलझाना है ये मसला
चिड़िया का है आया दिन भर उड़ान छोड़ ने घोसला
रस्ता है लंबा तू चुनले जाना है किधर
सालों बाद आएगा वापिस फिर तू इस नगर
चाहे वो पेडल हो स्कूटी हो या हो गाड़ी में
चाहे मारुति, मर्सिडीज या पीली काली में
[Verse 6]
तेरी कलम सियाही
खाली पन्ना ये जीवन
तू खुदका ही सिपाही
फूल एक काँटों के भीतर
तेरी कलम सियाही
खाली पन्ना ये जीवन
मिट्टी में खेल ले
आज मेल है साफ़ कर लेंगे कल
[Verse 7]
तेरा है कल
तेरा है आज
तेरा तू जो भी चाहे
तेरी फसल
वो ही उगेगा
जो तू बोलते जाए
नदी के पार
उल्टी धारा में तू गोते खाए
सपने खुदके लिखते हम
हक़ीक़त ये कलम बनाए
चलते जाए
नंगे पाँव
पहुंचे हम है सूरज पे
मन की ऐसी ताक़त पश्चिम को बनादे पूरब ये
ख़ुद करे क़यामत हमपे करना ना दया कब
आँखें वही है अपनी सोच बदल
दिखेगा नया सब
[Verse 8]
तू ना अकेला राही
मुश्किल समय लगे जब
आंखों को बंध करके
याद करले तेरा मक़सद
मंज़िल बदलती रहती
मन से बदलते मंज़र
सफर में याद रख
इन सेकडो दिलों में है तेरा घर
[Verse 9]
तेरी कलम सियाही
खाली पन्ना ये जीवन
तू खुदका ही सिपाही
फूल एक काँटों के भीतर
तेरी कलम सियाही
खाली पन्ना ये जीवन
मिट्टी में खेल ले
आज मेल है साफ़ कर लेंगे कल
[Verse 10]
जहाँ भी जाएगा आएगा वापिस तू
समय ना रुकेगा पर इस पल को कस तू
लिखले दास्तान पकड़ले कलम तू
कागज़ के पन्नो को बनादे कागज़ के फूल
जहाँ भी जाएगा आएगा वापिस तू
समय ना रुकेगा पर इस पल को कस तू
लिखले दास्तान पकड़ले कलम तू
कागज़ के पन्नो को बनादे कागज़ के फूल
Written by: Mohak Kukreja
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