album cover
Kaabil
2
Indian
Kaabil was released on December 9, 2021 by Kalamkaar as a part of the album Since 1999 - EP
album cover
Release DateDecember 9, 2021
LabelKalamkaar
LanguageHindi
Melodicness
Acousticness
Valence
Danceability
Energy
BPM95

Music Video

Music Video

Credits

PERFORMING ARTISTS
Ghaatak
Ghaatak
Performer
COMPOSITION & LYRICS
Ghaatak
Ghaatak
Songwriter
Parveen Mehra
Parveen Mehra
Composer

Lyrics

[Verse 1]
दादा का था सपना बनु अफसर
दीदा हटा फड़ने से और छोड़ दिए अवसर
हादसे में अपने सपने तोड़ दिए हस कर
सोचा क्या था होगा निकला क्या ही बावे सच पर
कोई पूछे मुझ से क्या कर रहा है
मैं रहने लगा बच कर
दो वीडियो में कपड़े सेम रहा तो भी जच पर
बाप वकील मेरा मेरे लिए जज पर
फ़ैसला सुनाया जो भी दिल में तेरे सब कर
[Verse 2]
पर शायद ना मैं काबिल इतना
मैं सोच रहा जितना ख़ुद को
शायद ना मैं बुरा इतना
मैं कोस रहा जितना ख़ुद को
लगु ख़ुद को मैं बदला सा
है होश रहा जितना ख़ुद को
लगे ख़ुद से लू बदला सा
दे दोष रहा जितना ख़ुद को
[Verse 3]
मैं जब भी लड़ता घर में माँ और बाप से
माँ कहती तुझको भी दर्द होगा
बेटा मेरे बाप बनके
औलाद को पलना कितना है मुश्किल
ना समझते थे हम जब किसी की
औलाद हम थे
[Verse 4]
खोया मा को सोलह साल पहले बाप से भी दूर
जो सर पर हाथ था ना अब वो हाथ चमके
जो तू कर रहा क्या वो लगे ठीक
जवाब की ना जल्दी फुरसत से तू अंदर झाक मानके
देखा तो काफी कुछ है सीखा भी काफी ख़ुद है
हारा मैं ख़ुद पर जीता भी तो काफी ख़ुद है
ख़ुद से नाराज़गी है है ख़ुद से शिकवे बहुत
बोला जो दिल में था रहा लिया अब काफी चुप मैं
बातें दिल में है घर करे सर चढ़े गुस्सा
मेरा गुस्से से है घर जले
पर कैसे घर चले
[Verse 5]
आए ना है वतन जब
खुदा है झूठा लगता लगने लगता शैतान सच
उम्मीद टूटे माँ की रोज़ देखूं आँसू आते
चाहू गले लगाना पोछू कैसे आँसू जाके
कारण घर में मैं हर एक कलेश का
नींद ना नसीब चाहू सोना भाई लड़ू गाके
जीतू मैं रोज़ और मा को दू मैं हार लाके
कुछ ना छूटे तुम्हें दू मैं इतना प्यार लाके
जितना हो मुझसे चाहू करना उतना पा
खोटियों में रहना तुमको मुश्किलों से बाहर आके
[Verse 6]
पर शायद ना मैं काबिल इतना
मैं सोच रहा जितना ख़ुद को
पर शायद ना मैं बुरा इतना
मैं कोस रहा जितना ख़ुद को
शायद ना मैं काबिल इतना
मैं सोच रहा जितना ख़ुद को
पर शायद ना मैं बुरा इतना
मैं कोस रहा जितना ख़ुद को
Written by: Ghaatak, Parveen Mehra
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