album cover
Sheher
2,232
Hip-Hop/Rap
Sheher was released on March 22, 2022 by Universal Music India Pvt Ltd. as a part of the album Sheher - Single
album cover
Release DateMarch 22, 2022
LabelUniversal Music India Pvt Ltd.
LanguageHindi
Melodicness
Acousticness
Valence
Danceability
Energy
BPM82

Music Video

Music Video

Credits

PERFORMING ARTISTS
Raga
Raga
Vocals
COMPOSITION & LYRICS
Raga
Raga
Songwriter, Composer
PRODUCTION & ENGINEERING
Raga
Raga
Recording Engineer
YAWAR
YAWAR
Mixing Engineer, Mastering Engineer, Producer

Lyrics

[Verse 1]
बचपन से
घरके भार लड़के चार
पापा सुनले तो मिलता सरपे भरके प्यार
करके दरकिनार सबके पैर पड़ते भार
वो पहला प्यार पहला वो खुमार
पहले कुछ का वो बुखार
याद है पार्क भसड़ में पहला करना सीखा वार
ना तीज ना त्यौहार
बैठे करते झांझ
करते सब बखान किस फ़लाने ने है तोड़ी किसकी गांड
किसपे लगरा कितने का सामान
किसपे लगरी कितनी धारा किसने काटली तिहार
किसका चढ़ता पहले पारा
कौन करता किसको कॉल
किसपे कितने लड़के किसकी कितनी चौड़
टूटी बोले किस मोड़ पे है किसकी इतनी बोल
राग
निकले रात को जो लड़के घर में घुसते है
शहर में
मेरे शहर में
होते काण्ड सरेआम
सड़के सूनी है केहर में
मेरे शहर में
निकले रात को जो लड़के घर में घुसते है
शहर में
मेरे शहर में
होते काण्ड सरेआम
सड़के सूनी है केहर में
Mere
शहर में फैली बेचैनी
एक है नी
जिसपे सर पे केस पे है नि
काटे कलेस वेहमी
बातो में वेट है नी
बातों में हेट फैली
रातो में गेट तोड़
फिर बन्ने चले ये कैदी कौन
किसको सिखाता है कौन
किसको बताता मैं जॉब
करके कमाता था पर ना करने का इरादा
गलियों ने दिए गलत नशे जैसे मरने का वादा
गलियो ने सपने भी दिए तो पूरे करने वादा था
पन्ने भरने ज़्यादा तो बंदे भरने का खाता था
जिसका प्रिंसिपल बदमास वो क्या ही कर पाता
वो सोचते थे
वो सोचते आज भी उतना ही
गलत साबित करता आया पर
टेका कभी घुटना नी पर
मेरा भी उठता नी मन
गिरने पे झुकता नि
रुकना पड़ता पर रुकता नहीं
जितना करता बस उतना सही
लिखता पढ़ता पर बुक तो नहीं
सुख ना मिलता तो सुट्टा सही
थुकना पिटना पर मिटना नहीं
पुश्ते चलना पर पिसना नहीं क्या
[Verse 2]
समय के साथ साथ रोज मैं हु चलराहा
हूं सबसे तेज़ फिर भी आज क्यूं मैं जल रहा
ये सच है मेरा मुझसे तू है क्यूं ये सुनरहा
क्या देखा मुझको मुस्कुराता जो
तू यू मचल रहा
मेरे गाने सुनके आज हर लड़का मल्रहा
माल को रगड़ रहा
बाद से अकड़ रहा
कोई अपने आप से ही लड़ रहा
आज इतना जो है चलरहा ये कल ना था
ना ये मेरी कल्पना
ना ये मेरी सल्तनत
पर है बंदे अनगिनत
जिनको मुझपे कल था शक़
पर आज साथ है और साज़ है वो ज़िंदगी का
ना रिश्ता तोड़ता ना जोड़ता ना हु मसीहा
मैं करता बात सीधी साफ़ शब्दों में कमीना
चिढ़ सी होती ख़ुद को देख सामने जो शीशा
गंजे और हशीश का
माल तो अज़ीज़ था
पर मा ने सोचा ना था कि बेटा ऐसा कभी होगा
लेगा कुछ जो
बढ़ने लगते कष्ट तो
कड़वे लगते सच
मुझको भड़वे लगते सब लोग
जितने भी है आस-पास सारे मुझको भक्ष दो
पर जितने भी हैं खास मेरे
सारे मुझको लक्ष्य दो
Written by: Raga
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