album cover
UDDCHALEIN
365
Indian
UDDCHALEIN was released on May 20, 2022 by Sanjeeta Bhattacharya as a part of the album UDDCHALEIN - Single
album cover
Release DateMay 20, 2022
LabelSanjeeta Bhattacharya
Melodicness
Acousticness
Valence
Danceability
Energy
BPM66

Credits

PERFORMING ARTISTS
Sanjeeta Bhattacharya
Sanjeeta Bhattacharya
Performer
Aman Sagar
Aman Sagar
Performer
Full Power
Full Power
Performer
COMPOSITION & LYRICS
Sanjeeta Bhattacharya
Sanjeeta Bhattacharya
Songwriter
Aman Sagar
Aman Sagar
Songwriter
Full Power
Full Power
Songwriter

Lyrics

[Verse 1]
लगता था मुझे ज़िंदगी एक पहेली है
सोचने लगा कैसे मैं ये सुलझाऊंगा
भागे भागे सब आगे मैं पीछे रह गया
करू भी तोह क्या बातों में मैं सबकी बह गया
बातें भी तोह सब ऊँची ऊँची ही करते हैं
बातों में रखा है ही क्या सबको है पता
कोशिश जो करि हासिल तब ही तोह कुछ हुआ
हारे भी तोह क्या सीखने को कितना कुछ मिला
[Verse 2]
आ उड़ चलें कहीं
जहाँ कोई भी नहीं
छोटी सी है ये ज़िंदगी
हो कह दो कि तुम्हें
हो गया यकीन
नामुमकिन कुछ भी नहीं
[Verse 3]
कभी धूप कभी काले बादल
कभी आगे तट कभी होता आगे सागर
भाए मुझे होता रोशन चेहरा उसका जब
पर भाए मुझे उसके आँख का काजल भी
ऐसी ये ज़िंदगी
थोड़ा प्यार थोड़ी नोक झोक
ना वक्त ज़ाया कर सोच सोच
दूर संकोच को रख
जो कर सोच समझ के
मुस्कुरा के
होनी खुशनुमा ये साँसें भी चलती जो
लगे खुशनसीबी उह
काफी मैंने एक ही घूट में पी ली उह
काफी है मैंने यूँ घुट के जी ली उह
[Verse 4]
आता गुस्सा जब गलतियां ख़ुद की थी नी
आर्मी ब्रैट पर डिफेन्स नि कोई मेरा
मैं हाथ से हाथ मिलाता रखता नी कोई गिला
ना कोई मिला घमंड और दया के बीच में
नी भागा मैं अतीत से
खुशी मिली धीरे तोह मैं दूर रहता स्पीड से
Gone off the deep end
Back like a sequel i had to go reset
They gas you up if you got an opinion
टनल विजन रखा कभी देखा नि मैं पीछे
हार के भी सीखे
इरादों से विजेता बन
कुछ लोग गरीब इतने यहां पे इनपे पैसा बस
चाहता नहीं मैं ज़्यादा यहां पे आया ख़ुद के पैरों पर
कंधों पे जो ज़िम्मेदारी सबकी मुझे है खबर
[Verse 5]
हर पल में है खुशनसीबी
रुको ना देखो तोह आस पास
ख्वाबों में है छुपी ये ज़िंदगी
[Verse 6]
गिर गिर के ही तोह मैंने उठना सीखा है
डर डर के ही तोह डर पे काबू करना सीखा है
रोको ना मुझे टोको ना मुझे बिलकुल भी
अभी अभी तोह मैंने खुलके जीना सीखा है
[Verse 7]
आ उड़ चलें कहीं
जहाँ कोई भी नहीं
छोटी सी है ये ज़िंदगी
हो कह दो कि तुम्हें
हो गया यकीन
नामुमकिन कुछ भी नहीं
[Verse 8]
नामुमकिन कुछ भी नहीं
Written by: Aman Sagar, Full Power, Sanjeeta Bhattacharya
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