album cover
Madari
36
Indian Pop
Madari was released on July 8, 2022 by 1946044 Records DK2 as a part of the album Souljah
album cover
AlbumSouljah
Release DateJuly 8, 2022
Label1946044 Records DK2
LanguageHindi
Melodicness
Acousticness
Valence
Danceability
Energy
BPM85

Credits

COMPOSITION & LYRICS
Mo Boucher
Mo Boucher
Songwriter
pranav chaganty
pranav chaganty
Songwriter

Lyrics

मेरा खयाल वही मेरी असलियत
तस्बीह अभी बाकी तो बाकी कैफ़ियत
हैसियत मेरी ज़ब्त अभी यही सच
मस्ती में ले डूबे मुझे ये सिफत
मदारी मैं और फ़ानी है तू
आसमानी कलम से लिखी कहानी है तू
समंदर में बेह रहा पानी है तू
एहसास जो बयान ना करसके ज़ुबानी ये तू
मदारी मैं और फ़ानी है तू
मुस्कुरा उलझनें छपी पेशानी पे क्यों
समंदर में बेह रहा पानी है तू
डूबने का डर तुझे ना जाने क्यूं? आये!
कैसे हो सके ज़ाहिर हक़ीक़त आपकी
करने लगा मैं पाबंदी हर नमाज़ की
ढका सर और बदला मेरा लिबास भी
फिर भी क्यूं लगे कि बाकी रह गया कुछ आज भी
जुस्तजू से गुफ़्तगू
कईयों से मैं हुआ रूबरू
लगे गलत इन्हें सवाल ही
जी हुज़ूर है आरज़ू
मैं देखु नूर बावज़ू
दिन दहाड़े खुली आँख से
गहे खुंदम गहे गिर्युम गहे उफ़्तुम गहाय खेज़ुम
मसीहा दर दिलुम पैदा ओ मन बीमार मे गरदम
मदारी मैं और फ़ानी है तू
आसमानी कलम से लिखी कहानी है तू
समंदर में बेह रहा पानी है तू
एहसास जो बयान ना करसके ज़ुबानी ये तू
मदारी मैं और फ़ानी है तू
मुस्कुरा उलझनें छपी पेशानी पे क्यों
समंदर में बेह रहा पानी है तू
डूबने का डर तुझे ना जाने क्यूं? आये!
थोलगिपोवुनन्ता चीडा नुव्वु कनटापडिथे
मुक्ति दोरुकुनंता भक्तिथोना वेनटपदिथे
नुव्वे मेमु अन्ना विषयमासलु बोधपडदे?
तेलुसुकुन्ना क्षणमे मनिशि
मेधदुकुन्ना गुनमे अन्नि विधमुला
मनसुथोन पदितरालु पातु मुदिपदुंदधा!
रबबबबंबंबंबम
अंते मनसु पुलकरिंचधा!
मधिनी थदिमि पलकरिंचग
परिथपिंचि परवसिंचना
नुव्वु कनिकरिंचगा!
चिलकापलुकुलो, चिरुथा परुगुलो
नी उनिकि चीमा चितुकुलो
चिनुकु चिनुकुलो
लयला होयला अलला कुलुकुलो
विरिसे नगवुलो
मेरिसे मेरुपुलो
प्रति जीवी तलपुलो
प्रति मलुपुलो!
हाँ क़ाबिल ही नहीं मैं दर्जात के भी
फिर भी रहमत की पनघट में सास लेरी
कैसे रूह मेरी नूह की कश्ती में सुकून से
सजदे में कभी क़याम कभी रुकु में
मजनूँ हूँ मैं नहीं कर बेसर मुझे
बेघर मज्ज़ूब के तेवर बुरे
लबन के नहर किनारे ले चल मुझे
सिर्फ दर ए लतीफ पर ही ये सर झुके
मदारी मैं और फ़ानी है तू
आसमानी कलम से लिखी कहानी है तू
समंदर में बेह रहा पानी है तू
एहसास जो बयान ना करसके ज़ुबानी ये तू
मदारी मैं और फ़ानी है तू
मुस्कुरा उलझनें छपी पेशानी पे क्यों
समंदर में बेह रहा पानी है तू
डूबने का डर तुझे ना जाने क्यूं? आये!
Written by: Mo Boucher, pranav chaganty
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