album cover
SRCC.wav
12
Hip-Hop
SRCC.wav was released on July 29, 2022 by Wanandaf as a part of the album Hyp3r
album cover
AlbumHyp3r
Release DateJuly 29, 2022
LabelWanandaf
LanguageHindi
Melodicness
Acousticness
Valence
Danceability
Energy
BPM

Lyrics

बताऊ क्या मुझपे थी बीती
बाप को बड़ा देते बीपी
बाकी को देते बीट
मा बोली जाना एसआरसीसी
यहां करनी थी ग्यारहवीं नि तीसरी
बार
बेड़ा पार फूके ग ग
ऊपर हाथ मत हो फ्रीकी
ऊपर हाथ मत हो फ्रीकी
सारी रात चिल्लम चिल्ली नहीं संभलता
बेबी गिरा एक बार तोह मैं फिर नहीं फिसलता
होते सबके घर पे कांड बाहर
लगा बस एक पर्दा
खड़ा डटके जबही सारे बोले मुझको कि तू घर जा चल अब घर जा
वो नन्ही सी जान
था परेशान
दोस्त बना पंखा जब हुआ अपमान
खोलके रख कान
होरा था मेरा नुकसान
तब मैं बस कर्रा आराम
पहले से
डाला पढ़ाई पे पैसा
कमाने पैसा
ये लूप है कैसा
सीखा मैं जो भी हालात से
डीपीएस मॉडर्न की ट्रिप से रिहा मैं
बन्ना उससे हार्ड पर वो पिलपिला है
समाज ने बना दिया सरफिरा है
आज डाला पानी तोह कल फूल खिला
एडीएचडी नहीं बैठ सकता एक जगह पे
थेरेपी वाली भी सड़ी मुझसे
अंदर मेरे इतना गुस्सा भरा
ये सोते हमपे क्यूं यहां ओढ़के रज़ाई
यहां तभी होती इनकी कोट पिटाई
ये फ्लेक्स करते
बाप की कार जगुआर
हसल नहीं उसको बोलते लाड
उत्सह बढ़ाया था प्लग ने टीचर से ज़्यादा
यहा स्पसो मे घुसे सब गीदड़
क्लब में पीकर
फर्श पे जीकर
पड़ी फिर सूरज की क-क-क-किरण
मैं फिसला क्यूंकि देखी सोने की हिरन
सारी रात चिल्लम चिल्ली नहीं संभलता
बेबी गिरा एक बार तोह मैं फिर नहीं फिसलता
होते सबके घर पे कांड बाहर
लगा बस एक पर्दा
खड़ा डटके जबही सारे बोले मुझको कि तू घर जा चल अब घर जा
सारी रात चिल्लम चिल्ली नहीं संभलता
बेबी गिरा एक बार तोह मैं फिर नहीं फिसलता
होते सबके घर पे कांड बाहर
लगा बस एक पर्दा
खड़ा डटके जबही सारे बोले मुझको कि तू घर जा चल अब घर जा
बताऊ क्या मुझपे थी बीती
बाप को बड़ा देते बीपी
बाकी को देते बीट
मा बोली जाना एसआरसीसी
यहां करनी थी ग्यारहवीं नि तीसरी
बार
बेड़ा पार फूके ग ग
ऊपर हाथ मत हो फ्रीकी
ऊपर हाथ मत हो फ्रीकी
ये कैसा नशा है
मासूम लोग बने खलनायक
गुस्सा डब्बा है गुस्सा डब्बा है
ये कैसा नशा है
मासूम लोग बने खलनायक
गुस्सा दबा है गुस्सा दबा हा
सारी रात
सारी रात
सारी रात
सारी रात
सारी रात चिल्लम चिल्ली नहीं संभलता
बेबी गिरा एक बार तोह मैं फिर नहीं फिसलता
होते सबके घर पे कांड बाहर
लगा बस एक पर्दा
खड़ा डटके जबही सारे बोले मुझको कि तू घर जा
चल अब घर जा
Written by: Hitesh Kakkar
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