album cover
Vish
4
Hip-Hop/Rap
Vish was released on July 15, 2022 by Saar Punch as a part of the album Oopar Neeche
album cover
Release DateJuly 15, 2022
LabelSaar Punch
LanguageHindi
Melodicness
Acousticness
Valence
Danceability
Energy
BPM93

Credits

PERFORMING ARTISTS
Saar Punch
Saar Punch
Performer
Lambo Drive
Lambo Drive
Performer
Bharg Kale
Bharg Kale
Performer
COMPOSITION & LYRICS
Saaraansh Batra
Saaraansh Batra
Songwriter
Bharg Kale
Bharg Kale
Songwriter
Janesh Arya
Janesh Arya
Songwriter

Lyrics

नंब है खड़ा, माइक के आगे आज सार
कुछ कर ना बैठू, लगे मेरे बुरे आसार
वो चाहते गले पे रख के गन बस ट्रिगर दबादू
बोलू बाय बाय, काली दीवारे ये रंग दू लाल
हाल फ़िलहाल में रातें ये मुझे काटती है
ना कटते दिन, फिर कैसे बीते जाते साल?
खाली दिमाग में, खाली शैतान
बन रहा वो काले खयाल
बस डर है, कभी उसकी जाऊ ना मान
हाँ, हस के ज़िंदगी तबाह की है
वैसे तोह बचा भी था कुछ नहीं
अब इनको लगता लड़का आलसी है
उससे दिखता कहीं भी टुक नहीं
जो मुझसे चाहती वो किया सब
फिर उसे लगे सच्चा इश्क नहीं
अब इनको सांप भी क्यूं बोलू मैं?
इतना कहा है उसमे विष भाई?
आवाज़, है दबी हुई
ये लात, है कांपती
नकाब, है सब पे दो
एक श्राप, थी आशक़ी
इलाका, ये दिल्ली वेस्ट
तोह धापा, है निके
ऊपर से, फ्रेश अंदर गल रहा, आती बास नहीं
मैं मुस्कुरारा
मेरे सर पे गिलोटिन
फिर भी हँसता जारा
दौड़े यहां खून में है अफीम शायद
हक़ीम शायद
बोले बचे गिनती के दिन शायद
बातें लगे कड़वी सच के साथ मैंने है दी चाय
और ख़ुद करी बोतल डाउन
मैं तोह कहाँ हूँ? पता नहीं
दिखु ना ढके मुझे धुए के ये क्लाउड्स
इस भार से हुआ चपटा
सालो और ना दबाओ
25 मिनट में मैं नापू अब
राजौरी से गुड़गांव
क्या बताऊ?
गाड़ी की रेस से मेरा क्यूं
पैर नहीं आ रहा
भाई रहने दे बत्रा
ये साला ज़हर नी बट रहा
फ*क सेल्फ लव, मेरा ख़ुद से बैर नहीं घट रहा
सुसाइडल नहीं पर जीने की अब है नहीं परवाह
तोह मोड़ पे भी गाड़ी मैंने120 पे काट दी है
शहर समझता मुझे
सड़कें ये सहलाती है
ऊँची इमारतें यहां पे जितना जगमगाती
हो भौचक्का ना तू बेटा
यहां पे गल्लियां उतनी काली है
ना मौत का मुझे अब डर भी है
मैं लड़ रहा ख़ुद से
कह सकता कि ये डरबी है
स्याही है खतम, कागज़ पे पड़ रहे अश्क़ मेरे
भाषा ये दर्द ही है
हा हस के ज़िंदगी तबाह की है
वैसे तोह बचा भी था कुछ नहीं
अब इनको लगता लड़का आलसी है
उससे दिखता कहीं भी टुक नहीं
जो मुझसे चाहती वो किया सब
फिर उसे लगे सच्चा इश्क नहीं
अब इनको सांप भी क्यूं बोलू मैं (क्यूं क्यूं क्यूं क्यूं?)
इतना कहा है उसमें
जाने क्यूं अब मैं
यूँ ऐसे खोया रहता हूं?
आगे बढ़ते हुए
बीते कल में सोया हु
इन काली रातों में
अब इशारे कर दे तू
रहता ख़ुद से खफा
ले जा मुझको मुझसे दूर
हा हस के ज़िंदगी तबाह की है
वैसे तोह बचा भी था कुछ नहीं
अब इनको लगता लड़का आलसी है
उससे दिखता कहीं भी टुक नहीं
जो मुझसे चाहती वो किया सब
फिर उसे लगे सच्चा इश्क नहीं
अब इनको साँप भी क्यूं बोलू मैं
इतना कहा है उसमें विष?
Written by: Bharg Kale, Janesh Arya, Saaraansh Batra
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