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Singham (From "Singham")
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Lyrics

[Verse 1]
मन भंवर उठे तन सिहर उठे
जब खबर उठे के आवे (सिंघम)
ना अगन जले ना मगन जले
बस कहर चले जब आवे (सिंघम)
[Verse 2]
बुरों को खेंच के खेंच के
धूल दबीच के रहपथ पढ़ जाए
भालों को खींच के खींच के
बाहों में भींच के जप्पी मिल जाए
ना किसी से ये कम बड़ा इस में है दम
नर सिंह है ये सिंघम
[Verse 3]
मन भंवर उठे तन सिहर उठे
जब खबर उठे के आवे (सिंघम)
ना अगन जले ना मगन जले
बस कहर चले जब आवे (सिंघम)
[Verse 4]
दिल तोह सच्चा है इसे दिल में रख लो
सपना अच्छा है पलकों से ढकलो
दिल विल से तोह है ये इक बच्चा
शरारत करता ही फिरे
अगर कभी समझे इस को कोई कच्चा
घुसा ही मिले
ताज़ा है हवा का ये झोका
यहां वहां बहता ही फिरे
अगर कभी इसका रास्ता रोका
तूफान सर चढ़े
[Verse 5]
बुरों को खेंच के खेंच के
धूल दबीच के लेहपथ पड़ जाए
भालों को खींच के खींच के
बाहों में भींच के जप्पी मिल जाए
ना किसी से ये कम बड़ा इस में है दम
नर सिंह है ये सिंघम
मन भंवर उठे तन सिहर उठे
जब खबर उठे के आवे (सिंघम)
[Verse 6]
ये ना सटका है रस्ते से कठोर
तगड़ा झटका है दम है तोह चख लो
अतरंगी है जोश में चलता
बांहों में बिजली सी चले
बिसरे शोले शोले
दुश्मन तोह राख में जा मिलें
जैसे कोई शेर सेहरा में चलता
सारा जग रौंदता चले
यारों बस लड़ने का इससे चस्का
पर्वत से भिड़े
[Verse 7]
बुरों को खेंच के खेंच के
धूल दबीच के लेहपथ पड़ जाए
भालों को खींच के खींच के
बाहों में भींच के जप्पी मिल जाए
ना किसी से ये कम बड़ा इस में है दम
नर सिंह है ये सिंघम
[Verse 8]
मन भंवर उठे तन सिहर उठे
जब खबर उठे के आवे (सिंघम)
Written by: Ajay-Atul, Swanand Kirkire
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