album cover
Ram Darshan
64
Folk
Ram Darshan was released on January 27, 2023 by Narci as a part of the album Ram Setu - EP
album cover
Release DateJanuary 27, 2023
LabelNarci
Melodicness
Acousticness
Valence
Danceability
Energy
BPM80

Music Video

Music Video

Credits

PERFORMING ARTISTS
Narci
Narci
Performer
COMPOSITION & LYRICS
Narci
Narci
Songwriter
Shanti Swaroop
Shanti Swaroop
Songwriter

Lyrics

पता नहीं किस रूप में तय है मिलना मेरे राघव का
पता नहीं किस रूप में आकर खोलेंगे दरवाज़ा, हाँ
पता नहीं कब कैसी लीला नारायण मेरे खेलेंगे
पता नहीं किस रूप में दर्शन राम मुझे मेरे दे देंगे
पता नहीं किस रूप में आकर नारायण मिल जाएंगे
कर्मों की मेरी नैया हल्की पार प्रभु ही लगाएँगे
पता नहीं किस रूप में आकर नारायण मिल जाएंगे
क्या पता मेरा हाथ पकड़ वो त्रेता में ले जाएंगे
साँस रुकी तेरे दर्शन को, ना दुनिया में मेरा लगता मन
शबरी बन के बैठा हूं, मेरा श्री राम में अटका मन
बेक़रार मेरे दिल को मैं कितना भी समझा लूँ
राम दरस के बाद दिल छोड़ेगा ये धड़कन
काले युग का प्राणी हूं, पर जीता हूं मैं त्रेता युग
करता हूं महसूस पलों को, माना ना वो देखा युग
देगा युग कलि का ये पापों के उपहार कयी
छंद मेरा पर गाने का हर प्राणी को देगा सुख
हरि कथा का वक्ता हूं मैं, राम भजन की आदत
राम आभारी शायर, मिल जो रही है दावत
हरि कथा सुना के मैं छोड़ तुम्हें कल जाऊँगा
बाद मेरे ना गिरने देना हरि कथा विरासत
पाने को दीदार प्रभु के नैन बड़े ये तरसे हैं
जान सके ना कोई वेदना, रातों को ये बरसे हैं
किसे पता किस मौके पे, किस भूमि पे, किस कोने में
मेले में या वीराने में श्री हरि हमें दर्शन दें
पता नहीं किस रूप में आकर नारायण मिल जाएंगे
कर्मों की मेरी नैया हल्की पार प्रभु ही लगाएँगे
पता नहीं किस रूप में आकर नारायण मिल जाएंगे
क्या पता मेरा हाथ पकड़ वो त्रेता में ले जाएंगे
पता नहीं किस रूप में आकर नारायण मिल जाएंगे
पता नहीं किस रूप में आकर नारायण मिल जाएंगे
इंतज़ार में बैठा हूं, कब बीतेगा ये काला युग?
बीतेगी ये पीड़ा और भारी दिल के सारे दुख
मिलने को हूं बेक़रार, पर पापों का मैं भागी भी
नज़रें मेरी आगे तेरे, श्री हरि, जाएँगी झुक
राम नाम से जुड़े हैं ऐसे, ख़ुद से भी ना मिल पाएं
कोई ना जाने किस चेहरे में राम हमें कल मिल जाएँ
वैसे तोह मेरे दिल में हो, पर आँखें प्यासी दर्शन की
शाम-सवेरे, सारे मौसम राम गीत ही दिल गाए
रघुवीर, ये विनती है, तुम दूर करो अंधेरों को
दूर करो परेशानी के सारे भूखे शेरों को
शबरी बनके बैठा, पर काले युग का प्राणी हूं
मैं जूठा भी ना कर पाऊँगा पापी मुँह से बेरों को
बन चुका बैरागी, दिल नाम तेरा ही लेता है
शायर अपनी सांसें ये राम-सिया को देता है
और नहीं इच्छा है अब जीने की मेरी, राम, यहां
बाद मुझे मेरी मौत के बस ले जाना तुम त्रेता में
राम के चरित्र में सबको अपने घर का
अपने कष्टों का एक जवाब मिलता है
पता नहीं किस रूप में आकर नारायण मिल जाएंगे
कर्मों की मेरी नैया हल्की पार प्रभु ही लगाएँगे
पता नहीं किस रूप में आकर नारायण मिल जाएंगे
क्या पता मेरा हाथ पकड़ वो त्रेता में ले जाएंगे
पता नहीं किस रूप में आकर नारायण मिल जाएंगे
कर्मों की मेरी नैया हल्की पार प्रभु ही लगाएँगे
पता नहीं किस रूप में आकर नारायण मिल जाएंगे
क्या पता मेरा हाथ पकड़ वो त्रेता में ले जाएंगे
बन चुका बैरागी, दिल नाम तेरा ही लेता है
शायर अपनी सांसें ये राम-सिया को देता है
और नहीं इच्छा है अब जीने की मेरी, राम, यहां
बाद मुझे मेरी मौत के बस ले जाना तुम त्रेता में
बन चुका बैरागी, दिल नाम तेरा ही लेता है
शायर अपनी सांसें ये राम-सिया को देता है
और नहीं इच्छा है अब जीने की मेरी, राम, यहां
बाद मुझे मेरी मौत के बस ले जाना तुम त्रेता में
पता नहीं किस रूप में दर्शन राम मुझे मेरे दे देंगे
Written by: Narci, Shanti Swaroop
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