album cover
Shayad
999
Pop
Shayad was released on December 12, 2023 by Sony Music Middle East / South Asia as a part of the album Shayad - Single
album cover
Release DateDecember 12, 2023
LabelSony Music Middle East / South Asia
LanguageHindi
Melodicness
Acousticness
Valence
Danceability
Energy
BPM84

Credits

PERFORMING ARTISTS
AUR
AUR
Performer
COMPOSITION & LYRICS
Raffey Anwar
Raffey Anwar
Composer
Usama Ali
Usama Ali
Lyrics
Ahad Khan
Ahad Khan
Lyrics
PRODUCTION & ENGINEERING
Raffey Anwar
Raffey Anwar
Producer

Lyrics

शायद हुआ सही, हम मिले ही नहीं
तेरी तलब अभी दिल में ही है कहीं
बातें भी ना हुईं, नज़रें भी ना मिलीं
हैरान तु कर गया, दिल मेरा भर गया
अक्सर हुआ यही, मैं ग़लत, तू सही
तू मेरा मान था, तू भी मुकर गया
तू भी मुकर गया
दिल से उतर गया
तेरी तस्वीर ले के सोचूँ तेरे बारे में
बची तन्हाई, और सिर्फ मैं और तारे हैं
बस इसी आसरे पे कटती हैं रातें मेरी
कि शायद सोचता होगा वो मेरे बारे में
हाँ, जिस नज़र का मैं हूं मुंतज़िर, हूं आज भी
उसी नज़र को मेरा इंतज़ार था नहीं
तरस गए हैं जिस पुकार को ये कान मेरे
वो सब जानता है, बस पुकारता नहीं
कभी तू है शायद, कभी तू यक़ीन है
कभी तू है शायर, कभी शायरी है
कभी तू है मेरा, कभी अजनबी है
कभी तू यहीं है, कभी तू नहीं है
मेरे इन लबों पे बस एक काश सी है
जो रोने ना देती वो तेरी हँसी है
जो तेरी जगह थी वो खाली पड़ी है
तू मुझसे है दूर, पर यादें यहीं हैं
बस तेरी ही यादें इस दिल को जगाती रहीं
तेरे बिन अधूरा, मुझे क्यूँ है तू लाज़िमी?
मैं ठहरा मुसाफ़िर और चुभती है तेरी कमी
हर शए ही है हासिल, बस तू ही ला-हासिल रही, ओ अजनबी
शायद हुआ सही, हम मिले ही नहीं
तेरी तलब अभी दिल में ही है कहीं
बातें भी ना हुईं, नज़रें भी ना मिलीं
हैरान तु कर गया, दिल मेरा भर गया
अक्सर हुआ यही, मैं ग़लत, तू सही
तू मेरा मान था, तू भी मुकर गया
तू भी मुकर गया
दिल से उतर गया
वो कहती थी, आंखों में मेरी है नमी
और नमी तो होती वफा की निशानी
नमी की है कमी आंखों में तुम्हारी
जो देखी है कुछ अब तस्वीरें पुरानी
वो कहती थी, लफ्जों में मेरे उसे
एक अक्स सा मिलता है
तलाश थी उसे जिस शख्स की, मेरा ही चेहरा
उस शख्स से मिलता है
बे-रुखी कर गए हो नए अंदाज़ से तुम
इस चुप सी आवाज़ का तो नाज़ थे तुम
ऐसे पास थे तुम, जैसे साज़ में धुन
अब सुन'नी है आवाज़ तो जा के रास्ते सुन
आते ही नहीं, ये सोचो, काश कि तुम
ऐसे बिखरोगे, जैसे पत्ते ताश के तुम
मेरा कल, मेरा माज़ी, मेरा आज थे तुम
अरे, बीती बातें छोड़ो, मेरा ख्वाब थे तुम
हैं आँसू क्या लाज़िम, जो याद है आती तेरी?
वो मुश्किल की घड़ी जुदाई का वक्त नहीं
मैं ख्वाब भी देखूं तो ख्वाबों में भी है तू ही
है दिल कह रहा, हम मिलेंगे दोबारा कभी, शायद कभी
शायद हुआ सही, हम मिले ही नहीं
तेरी तलब अभी दिल में ही है कहीं
बातें भी ना हुईं, नज़रें भी ना मिलीं
हैरान तु कर गया, दिल मेरा भर गया
अक्सर हुआ यही, मैं ग़लत, तू सही
तू मेरा मान था, तू भी मुकर गया
तू भी मुकर गया
दिल से उतर गया
Written by: Ahad Khan, Raffey Anwar, Usama Ali
instagramSharePathic_arrow_out􀆄 copy􀐅􀋲

Loading...