album cover
2006
2
R&B/Soul
2006 was released on November 2, 2023 by ZYRAP as a part of the album 2006 - Single
album cover
Release DateNovember 2, 2023
LabelZYRAP
Melodicness
Acousticness
Valence
Danceability
Energy
BPM59

Credits

PERFORMING ARTISTS
ZYRAP
ZYRAP
Performer
COMPOSITION & LYRICS
Shashank Rawat
Shashank Rawat
Composer
PRODUCTION & ENGINEERING
BRUTAL BABA
BRUTAL BABA
Engineer
SLEEPLESS BEATS
SLEEPLESS BEATS
Producer

Lyrics

मेरे गाने बने मरज़, मेरे हाथों में है दर्द
मैंने पाले सारे साँप, मेरे दोस्त ही नहीं अब
मेरे शब्द है लकीर, मेरे साथ चले रब
मेरे हाथ बंदी घड़ी, मुझे लगा काफी वक्त
मेरे हाथ बंदी घड़ी, मुझे लगा काफी वक्त
मेरे शब्द है लकीर, मेरे साथ चले रब
मैंने पाले सारे साँप, मेरे दोस्त ही नहीं अब
काश रोक पाता लफ्ज़ को अपने, खुदी हाथ मारा
सिर जला डाला सारे रिश्तो को
१ शख्स भी नि पास आज मेरे जिसे मेरी हो कदर
बिना जाने मेरी फितरत को. नहीं नहीं कुछ सही नहीं
आस पास लफ्ज चढ़े रोज़ लेकिन चीखने को कमरा नहीं
मौत रोज़ अरी कमरे में मेरे लेकिन मौत के बाद
4 कंधे नसीब नहीं. लोग काफी मेरे पास आते रोज़
लेकिन पूछता जो हाल ऐसा एक इनसान नहीं
और पूछने का ढोंग काफी बुरा क्यूं बताऊँ मेरा हाल
जिसे दिल से ही परवा नहीं. पठार भरे सीने में
मेरे आँखें बंद दिखे माँ बाप दोस्त जिनका सगा नहीं
भागा तेज था मैं अपनो के साथ लेकिन आगे जाकर देखा
पीछे 1 मेरे साथ नहीं. 2006 दिल के पास ये मेरा कर्स
बना रैप मेरी शायरी में दर्द नहीं
बस भरे मैंने लफ्ज मेरे दिल के जो आजकल सुनने को
पास मेरे शख्स नहीं सीख हार से मैं सीखते हूं आया
लेकिन कितना मैं हारु खुदा जीत का तू स्वाद दे
गला सूखा मेरा सुबह होने आई रात भर रोया
नींद बिना बीच खड़ा गैरों के. कैसे मोड़ पे ये
ज़िंदगी में दिलागी से खफ में हूं खड़ा काफी महीनों से
जिस शख्स के था दिल के मैं पास उसी शख्स ने है
थोड़ा आज डरता हूं रिश्तों से. तू बोल मेरी क्या है सजा
जोकि खतम ही नि होरी पूरा बीत चुका साल भी
आज जान चुका दर्द झेले रोज़ मैंने कहीं ना कहीं
वो थी सीख जानी जीवन की. वक्त साथ दे या जीत
मेरे हाथ में पर जीत का क्या फ़ायदा जो मां बाप साथ नहीं
पत्थर घुसे पाउ में हज़ार सब्र टूट चुका मेरा
लेकिन आज भी आप साथ नहीं. वफा नाप दे ये पैसों के
नीचे मेरे हाथ पड़े लाल खून दिखे मुझे अपनों का
5 साल से नी दोस्त बने मेरे थे जो बने साले
साँप खाए रोज़ मेरी किस्मत का. क्यूं नाम मेरा
काम से नहीं जाने आज लोग काफी चाट ते जो कल थे हाँ
पास नहीं
आज वक्त पड़ा पास मेरे बहुत लेकिन अपनों के साथ
मेरा वक्त ही नही आज भाई. रोज़ नोचता मैं खुदके
सवाल बजे ढाई हाथ ब्लेड और यादें कुछ गैरो की
मौन बैठा एक कमरे में बंद २ साल से नी बात करी
मैंने मेरे सपनों की. शायद मेरी जान मेरी कलम में
जो हर रात चले रब थोड़ी सी तो मेहर कर
तेरा बेटा नीचे भागता है रोज़ लेकिन फायदा
कुआ भागने का पेट ही नी भरे जब. शायद मेरा
वक्त है खराब या है कर्म जो पड़ा पीछे बीत
चुका साल भी
शायद मेरा वक्त ही नि बचा भारी कंधों के वास्ते
मैं टिका हुआ आज भी. शायद से वो खो चुका मैं
जो था बनना मुझे उसे भूल चुका मैं
जो हूं बना वो ना पसंद मुझे गाने सारे दर्द
भरे अपनों से फ़ासला बना चुका मैं. फिर भी छोड़ी
ना उमीद मेरे बाप से जो आई शायद गाने वाने
फेम २ वक्त की ही रोटी दे
पर खुशी तो है उसीमें ना भाई चाहे रोटी मिले
1 जाए बस मां के पेट में
Written by: Shashank Rawat
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