album cover
Ajnabi
R&B/Soul
Ajnabi was released on June 14, 2024 by Kahi Door as a part of the album Kahi Door - EP
album cover
Release DateJune 14, 2024
LabelKahi Door
LanguageHindi
Melodicness
Acousticness
Valence
Danceability
Energy
BPM95

Music Video

Music Video

Credits

PERFORMING ARTISTS
Zai
Zai
Performer
COMPOSITION & LYRICS
Parth Saklecha
Parth Saklecha
Songwriter
PRODUCTION & ENGINEERING
Psyko
Psyko
Producer
Pogo Beats
Pogo Beats
Mixing Engineer

Lyrics

शर्म भुलादे सारे यहां पे अजनबी
शायद ना मिलेंगे तुझको फिर कभी
ना मिली तेरा जैसी ढूंढा मैंने हर गली
एक ही तू सुन सके ये बातें मेरी अनकही
उठाले तू हवा में हाथ
मन में जो भी परेशानी तू भुला दे आज
बस तू आके मेरी महफ़िलें सजादे
क्यूं रखें बातें दबाके कुछ सुना दे आज
भरी भीड़ में तू देख मेरी आँखों में
तू हुबहू वही जो आती मेरे ख्वाबों में
आजा घूमे अंजानी सड़को पे रातो में
मंज़िल पाने से ज़्यादा मज़ा ये राहो में
क्या होरा मुझे कुछ समझ ना आता
तू ही दिखे हर तरफ़ जिधर नज़र घुमाता
तू ही वजह कि मैं बेवजह यूँ मुस्कुराता
मैं धुन बजाता तू भी आके थोड़ा गुनगुनाना
थक चुका था हा मैं पहले कुछ भी कह सका ना
पर जब कलम उठाता पूरी मैं कसर चुकाता
तू सुन ज़रा से बैठे तेरे आसरे पे
होते खफ़ा नहीं फ़ासलो से
ख़ुद ही ने सफर चुना था
है देखा पहले भी तुझे ये लगता देजा वू
कैसा जादू ये किया तूने मैं बेकाबू
दिलवाला हुआ दीवाना जो मुड़के देखा तू
अलग जहान यहाँ पे शर्तें ना कोई लागू
कही दूर लेके आया ये फ़ितूर तोह
तू झूम मेरे साथ खाली आज की रात
नहीं करनी काम की बात
तू सारी ज़िम्मेदारी भूल के फ़िज़ूल
खड़ी दूर क्यूं तू आजा मेरे पास और
शर्म भुलादे सारे यहां पे अजनबी
शायद ना मिलेंगे तुझको फिर कभी
ना मिली तेरा जैसी ढूंढा मैंने हर गली
एक ही तू सुन सके ये बातें मेरी अनकही
उठाले तू हवा में हाथ
मन में जो भी परेशानी तू भुला दे आज
बस तू आके मेरी महफ़िलें सजादे
क्यूं रखें बातें दबाके कुछ सुना दे आज
शर्म भुलादे सारे यहां पे अजनबी
शायद ना मिलेंगे तुझको फिर कभी
ना मिली तेरा जैसी ढूंढा मैंने हर गली
एक ही तू सुन सके ये बातें मेरी अनकही
ना जा तू मुझे छोड़ के अकेला
तेरे सिवा यहा कोई नहीं मेरा
तू रोशनी है दूर कर अंधेरा
तेरे सिवा यहा कोई नहीं मेरा
शर्म भुलादे सारे यहां पे अजनबी
शायद ना मिलेंगे तुझको फिर कभी
ना मिली तेरा जैसी ढूंढा मैंने हर गली
एक ही तू सुन सके ये बातें मेरी अनकही
उठाले तू हवा में हाथ
मन में जो भी परेशानी तू भुला दे आज
बस तू आके मेरी महफ़िलें सजादे
क्यूं रखें बातें दबाके कुछ सुना दे आज
Written by: Parth Saklecha
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