album cover
DARAAJ
album cover
DARAAJ was released on July 16, 2024 by RAPresent as a part of the album DARAAJ - Single
July 16, 2024
LabelRAPresent
LanguageHindi
BPM86
Melodicness
Acousticness
Valence
Danceability
Energy

Music Video

Music Video

Lyrics

एक ही रोड दिखे आगे मुझे साफ
खोलू दिल के जो बंद थे दराज
हक़ छीन ने में लगे थे जो आप
कहा सुनी हुई जो भी करो माफ़
एक ही रोड दिखे आगे मुझे साफ
खोलू दिल के जो बंद थे दराज
हक़ छीन ने में लगे थे जो आप
कहा सुनी हुई जो भी करो माफ़
शांति भंग मेरे संग करु हल्ला गुल्ला
पाओगे सामने नी टिक मैं तो बोलू खुल्ला
ये जाने ब्लू टिक पर कौन ही नितिन से मिला
और जो भी मिला पूछो उससे आज तक नि भूला
अब देखो और सुनो विटनेस करो नई चीज़
लॉकडाउन में माइंड किया ओपन लिख दी थीसिस
फाड़ दी पुरानी डायरी उठालो पीसेस
सिर भी रखलो काटो मुझसा पाओगे पर नी लिख (बिच)
सीधे मिडज़ोन से होगे तेरी रिंगटोन पे
चाँद पे बैठा हु मैं दूर भैया गैटोंडे
करन अर्जुन आए वापस गर्मी माहौल में
देखो आँखें फाड़ के और म्यूजिक सुनो कान खोल के
खो जाए विचार में हम ऐसी तुझको बात बोल दे
ख़ुद को उभारु मैं नि फसा बीच नापतोल के
ये लंबे बाल लंबा टाइम किया काम बहुत है
हवाएं गरम बहे माइक पे जो सांस छोड़ दे।
रोज़ ही लिखता मैं आप बीती
बात करता डायरी से रात ये अकेले नहीं काटनी थी
पेन ये कुत्ती काटे जब भी करदूँ इशारा
भेजे की गुत्थी वफ़ादार से ही बांटनी थी
खुदा गवाह मेरे सिर चढ़ी थी माया
किस को बोलू क्या अब जाके ऐसी किस्मत होना लाज़मी थी.
माँ कहती ज़ालिम है ये प्रेमिका तेरी
मेरे बेटे का देखो देखो कैसा हाल कर गई नशपीती
आशिक़ी आज भी मिज़ाज़ प्रतिद्वंद्विता का
पी लिया ज़हर नहीं चाहता कोई दिलासा
मिट्टी शरीर बोले रोज़ की ज़मीन पे रह
और मेरी रूह पूछे भाव क्या है आशमा का
एक ही रोड दिखे आगे मुझे साफ
खोलू दिल के जो बंद थे दराज
हक़ छीन ने में लगे थे जो आप
कहा सुनी हुई जो भी करो माफ़
एक ही रोड दिखे आगे मुझे साफ
खोलू दिल के जो बंद थे दराज
हक़ छीन ने में लगे थे जो आप
कहा सुनी हुई जो भी करो माफ़
एक ही एक ही एक ही रोड दिखे आगे मुझे साफ
खोलू दिल के जो धूल खा रहे सालों से दराज
मेरा हक़ का नि छीन पाओ कोशिश करो लाख
रस्ते में गर कहा सुनी हुई करो माफ़
अर्जुन जैसे रखता बस मंज़िल पे आँख
शोर थोड़ा मेरे आने पे कर देना आप
ख़ुद निकलते ही पुल नि जलाता जनाब
साथ लेके चलू अपने और तेरे भी ख्वाब
खारी खाई सुबे आज कड़वी करू सीधी बात
जारी है तमाशा अली जनता है सारी बात
लहरों से कहो जाके दफन उनमें देखी लाश
पैर नहीं छूना आके तट पे हूं नंगे पाओं
थोड़े फ़ासले रखो जरा आहिस्ते चलो
दम के मरीज हो जरा खस्ते चलो
मुझे आहट तो रहेगी मेरे साथ हैं कुछ लोग
ये नाटक मैं लिखूंगा मैं ही निर्देशक हू दोस्त
मुझे डर लगे हर रात
घर करे एक बात घर आए याद
फिर पेन बने मेमसाब
जालिम सी फिर कागज़ो की कौन करे देखभाल
मेमने ये "मेंऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽ" करें देख रहा भेड़चाल
आधि रात डूबने को काली छाई आंधी
राख मरने को कूद पड़ी मैदानों में जलती आग
मैखानों में खूब लड़ी बुद्धि मेरी थक गई साब
बेचारो के घाव में मलहम मेरी मिर्ची बात
एक ही रोड दिखे आगे मुझे साफ
खोलू दिल के जो बंद थे दराज
हक़ छीन ने में लगे थे जो आप
कहा सुनी हुई जो भी करो माफ़
एक ही रोड दिखे आगे मुझे साफ
खोलू दिल के जो बंद थे दराज
हक़ छीन ने में लगे थे जो आप
कहा सुनी हुई जो भी करो माफ़
Written by: Ayush Khare, Jaydeep Hora, Nitin Mishra
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