album cover
Dil Ki Baat
8
Hip-Hop/Rap
Dil Ki Baat was released on August 23, 2024 by FHigh Entertainment as a part of the album Dil Ki Baat - Single
album cover
Release DateAugust 23, 2024
LabelFHigh Entertainment
Melodicness
Acousticness
Valence
Danceability
Energy
BPM59

Music Video

Music Video

Credits

PERFORMING ARTISTS
MC INSANE
MC INSANE
Performer
COMPOSITION & LYRICS
Prakash Sharma
Prakash Sharma
Songwriter

Lyrics

Yo
कितनों ने छीना हाथ से कलम
छुपाया है मुझसे घाव के मलहम
अगर मैं बच गया आज ज़िंदा
तो वादा है मिलेंगे कल हम
चिंता नहीं हैं इनको, मैं जियूँ या मरूँ
ये कहेंगे, "बैठ के दे-दे कोई गाना"
मैं कहूँ अगर कि "मरने वाला हूँ"
ये कहेंगे, "एक गाना देके ही जाना"
उतारो आरती इनकी, जो बन चुके स्वार्थी
इन्हें बस पड़ी है इनकी
तो मैंने भी अपनी इच्छाओं को अंदर ही गाड़ दी
इन्हें नहीं पड़ी है मेरे विचार की
मैंने न किसी से कोई भी उधार ली
कभी नहीं, कभी नहीं
सच ही तो है कि तुम मुझे खो दोगे
अगर मेरी आदतें मैंने कभी सुधार ली
वो कहती है, "कृष्ण है मन में"
कितने हैं tattoo तेरे बदन में?
कितने हैं राज़ जो इनमें दफ़न हैं
लोगों से अलग क्यूँ तेरी शकल है?
जलने वाला ही तो देता दख़ल है
जो मेरा आज है, वो तेरा कल है
जो तेरा कल, वो किसी का परसों
शोहरत को नहीं, ज्ञान को तरसो
माथे पे तेरे शक्तियाँ हावी हैं
मौत ही केवल मुक्ति की चाबी है
मुक्ति न ढूँढ ये जीवन के रहते
जी भर के जी ले जीवन के रहते
यूँ ही तू body बना रहा है
इशारों पे तुझे कोई और ही नचा रहा है
तू उसे अपनी गाड़ी में घुमा रहा है
और दिल और दिमाग़ से वो तुझे घुमा रहा है
पर छोड़, वो तेरे बाप की गाड़ी है
तभी तो तुझे कुछ नहीं समझ नहीं आ रहा है
वो गाली पे गाली, पे गाली दिए जा रहा है
बेशर्मों की तरह तू उधर ही जा रहा है
फ़ायदे का सोच के जाना नहीं वहाँ तू
फ़ायदे निकालने को आना नहीं यहाँ
हम फ़ायदे नहीं देखते, दे देते दिल
'का show पे show-off, हम जीतेंगे दिल
तो रहना क्यूँ किसी के क़ाबू में
काला है दिल इनका, सब काला जादू है
एक मेरा दोस्त, वो दुनिया में है नहीं
आधी रात को वो बैठा है बाजू में
आधी रात को मैं सोचूँ ये फिर से
सारे राज़ बता दूँ मैं सब को
पर सोचा मैं, जाने दो; करने दो मज़े
दिन भी तो सब के कम ही हैं बचे
पल में पलट गए, कैसे ये लोग
हम रिश्ते नहीं बनाते देख के fame
हम बिगड़े तो बिगड़े हैं ख़ुद की वजह से
न कर सकते किसी को blame
गाने नहीं, तुझे मैंने किताब दी
गाने नहीं, ये है ज्ञान की प्राप्ति
बड़ी बात मेरे गानों को होना
कहते हैं अपने, "ज़्यादा नहीं रोना"
ख़ुद को मैं इस तरह नोच रहा हूँ
ख़ुद को ख़तम कर दूँ, सोच रहा हूँ
पाने की कोशिश में खो दिया सबकुछ
और खो दिया जो भी, वो खोज रहा हूँ
भीड़ से अलग मैं ढूँढूँ एकांत
भीड़ में आऊँ तो रहूँ अशांत
हसरत है मेरी, आए वो रैना
लाए वो मोक्ष, कर दे मुझे शांत
अंदर जो बसा है वो अंतरात्मा
पूछूँ क्या उससे मैं भी एक सवाल
"क्यूँ बेहतर ही बनना है सबको एक-दूजे से?"
एक के जीत में दूजा हलाल
जो हारा है, उसका भी होगा कोई
जो उसका कर रहा होगा वहाँ इंतज़ार
वो पलट के आया तो पलट ही देगा
छीन के लेगा वो भी अपना स्थान
Written by: Prakash Sharma
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