album cover
aam bagh
1
Hip-Hop/Rap
aam bagh was released on March 27, 2025 by Scarred Squad as a part of the album aam bagh - Single
album cover
Release DateMarch 27, 2025
LabelScarred Squad
LanguageHindi
Melodicness
Acousticness
Valence
Danceability
Energy
BPM101

Music Video

Music Video

Credits

PERFORMING ARTISTS
Jagsifat Makkar
Jagsifat Makkar
Rap
COMPOSITION & LYRICS
Jagsifat Makkar
Jagsifat Makkar
Songwriter
PRODUCTION & ENGINEERING
Jagsifat Makkar
Jagsifat Makkar
Producer
Harshit Gakhar
Harshit Gakhar
Mixing Engineer, Mastering Engineer

Lyrics

आम बाग, गोन
आम बाग, गोन
आम बाग, गोन
लॉर्ड्स पिक, कॉनवीथ
मेरा हाल मेरे से कभी भी पूछ नहीं
क्योंकि दाएँ बाएँ हर तरफ़ उच्च नीच
सफेद पैसा तोह मुंह पर सूत ही
नेक अगर इरादा तोह सूखे पे मूत भी
शराब बनी गीले गालों का इलाज
भूख थी बुरी तोह हलचल में चल चल मजदूरी
मिली पेट को संतुष्टि तोह
अच्छे अनाज से बनी दस कदम दूरी
संकेत भगवान का माँगता ईमानदार
जितना बढ़ा धंधा इंसान का
उतना ही घर शैतान का शानदार
खुले में फल पे लगाएँ दाम बचे
जो चोरी छुपे घुसते थे आम बाग़
झोकते जो धूल थे आँखों में
अब फूँकते हैं माल
झूलते हैं रातों में
पहले खेलते थे गुल्ली डंडा
गुलशन में शामों में
अब उन्हें फुरसत नहीं डंडों की मारों से
अब हर दिन बदन नाचे गम की बरसातों में
अब लगे डर नहीं अपने हालातों से
अब झूठ भी सच लगे बातों में उनकी
मारी जो गरम पानी में दुपकी
गलती करी तोह पापा की जुट्टी लाल करती थी बुथी
याद आ जाती थी नानी जो टपकी
अब साँसों में अफ़ीम
जज़्बात बने नकली
संस्कारों में कमी
संसार में नकलची सब
मानव बना भेड़ बकरी
हाँ, बंदर जो करे ज़मीर की भक्ति
और सांड की मार्केट ही मदारी
और कानों में शोर कव्वाली
आन, बान, शान की कुरबानी बनी दलाली
और पाप के चाँद के नीचे मानती नवरात्रि, हुह
खास आम ही
आम नहीं आम, होता खास ही
बस्ती में जब नशीले रस्स की लीला रास हुई
तोह चली आम बाग में आरी
हाँ, हाँ, हाँ, हाँ, हाँ
खास आम ही
आम नहीं आम, होता खास ही
बस्ती में जब नशीले रस्स की लीला रास हुई
तोह चली आम बाग में आरी
पैसे की क्यारी राज़ थी
थी आम बाग में हरियाली
उड़ पैसे की आई आंधी
शान आम बाग की रह गई आधी
कहते होते दिक्कत में सफल
कीचड़ में कमल
चिकने हाथ का आकर नहीं बदलता
जब तक ना हों सूजे नक्ल्स
पतली टांगों की रगों में खून की जगह चलता ना बल
अगर गिरे ना तू कभी मुंह के बल
ज़िंदगी की पहेली के टुकड़े कभी जुड़े ना
खिलाड़ी अगर जाता नहीं टूट के खढ
और हार के लौटे ना कभी काका रूठ के घर
फ़ट्टेगा कभी ना अगर नहीं खोलेगा
पूरा सीना बारूद से मल
हटाता धूल को जल निकालता नूर का नल जो
दूर से गन ब्लो
बस दु दु के संग ज़ोर? नो ब्रो
कम क्लोज, मेली मार
चीज़ नि मिली जो, मार मन वो
दिमाग को खोले जो
वो ही करे लंग्स को बंद स्मोक
गले में हीरा
हीर हर एक को पसंद चोक करना
फिर अपने गले में चढ़े माला
जब उसे हग करे रोप
स्लग्स चखे होप, अश्क़ ढके गोल्ड
लव मरें रोज़, ठग्स बनें रोज़, हुह
लस्ट जैसे बनीस और बग्स बने दोस्त
Haha
दर्द बनी फनी, गंदे मर्ज़ लगे जोक
Wah, wah
तभी मुशायरों में बैठे सब अच्छे लोग
कायरों में शामिल हुए थे बहादुर जो
तभी कायदों में राहिल से रहते थे जो
अब बाग़ी वो
लिए गए फ़ायदों में जब गुम हुआ होश
मोरे साकी पॉर्ड़
जब लगा ग्लास में खतम रम
बोतल में थी बाकी और
जब लगा रास्ते में ही भसम गम
जनाज़े ने लिया आखिरी मोढ़
स्ट्रैंड मैंगो की घाँस बनी डोप रोके सब जो
खाँसते खाँसते
शरेआम सारे आम भागे आगे
आम के फल को पीछे छोड़
हाँ, हाँ, हाँ, हाँ, हाँ
खास आम ही
आम नहीं आम, होता खास ही
बस्ती में जब नशीले रस्स की लीला रास हुई
तोह चली आम बाग में आरी
हाँ, हाँ, हाँ, हाँ, हाँ
खास आम ही
आम नहीं आम, होता खास ही
बस्ती में जब नशीले रस्स की लीला रास हुई
तोह चली आम बाग में आरी
पैसे की क्यारी राज़ थी
थी आम बाग में हरियाली
उड़ पैसे की आई आंधी
शान आम बाग की रह गई आधी
पैसे की क्यारी राज़ थी
थी आम बाग में हरियाली
उड़ पैसे की आई आंधी
शान आम बाग की रह गई आधी
Written by: Jagsifat Makkar
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