album cover
TOO LATE
album cover
TOO LATE was released on April 5, 2025 by A-Music as a part of the album TOO LATE - Single
April 5, 2025
LabelA-Music
LanguageHindi
BPM119
Melodicness
Acousticness
Valence
Danceability
Energy

Lyrics

दोष भी ठीक लगता है
दोस्त भी अब कहाँ मिलता है
कहीं भी ना जी लगता है
धोखा यह फ्री मिलता है
कोई ना नसीब लिखता है
कोई ना करीब दिखता है
किसीकी आवाज़ दब रही है
किसीका मकान टूट रहा है
दोष भी ठीक लगता है
दोस्त भी अब कहाँ मिलता है
कहीं भी ना जी लगता है
धोखा यह फ्री मिलता है
कोई ना नसीब लिखता है
कोई ना करीब दिखता है
किसीकी आवाज़ दब रही है
किसीका मकान टूट रहा है
वो सोरहा था आखो में सपने लिए पर उठाजब तोह उसका सपना कोई तोड़ गया
जब पता चला के उसे आधी रात को उसका बाप उसे छोड़ गया
घर में थी ६ साल की बहन और माँ
के आखो में आसू का भोज था
ज़िम्मा उठाया उसने 17 में, माँ को लगाया गले से और आंसू को पोंछा
छोड़ दी स्कूल, वो जाता अब काम पे
सिर्फ 18 हज़ार में
माँ को वो जाने ना देता है गैरो के घर किसी भी काम पे
वो भेज रहा बहन को पढ़ने सरकारी
स्कूल में लेके किताबें
वो जाता ९ आता है १० ज़िम्मेदारी अब छुट्टी शरारते
कैसा वो बाप जिसने छोड़ा है औरत को एक दूसरी औरत के चक्कर में
कैसी वो औरत जो सोचे ना पहले
एक हस्ते घर को तोड़ने से
कैसी वो माँ जिसका बेटा है काम पे
इतनी कम उमर में
कैसी वो बेटी जो जाने भी ना अपने बाप को अच्छे तरीके से
पर वो बोले कुछ ना बस जाता है काम पे
आता है काम से मा को निहारके खाता वो खाने
सोता है आँसू दबाके रखता है तकिये के नीचे एक नोटबुक जिसपे वो लिखता था गाने हाँ लिखता था गाने
वो लिखता था गाने
उससे बनना था आर्टिस्ट
बना था लेखक
बना प्रोड्यूसर
खोलना था लेबल
आँखें खुली उससे संभले ना भोज
उसने फाड़ी हर पन्ने
और जला दिए पेजेस
समय से हारके देखे वो तारे
It's just break us
This is the saddest reality
जिसपे है टैलेंट वो बनता है बेबस
फिर पीछे से आती है एक आवाज़
सुनने में लगा जैसे गिरा ग्लास
वह भागा किचन में तोह देखा
के उसकी माँ घिरी पड़ी है सिंक के पास
वो थम सा गया फिर ली एक सांस
उठाके मा को लग्या हस्पताल
डॉक्टर ने बोला इट्स हार्ट अटैक
चाहिए ऑपरेशन के लिए 25000
उससे चाहिए है 25000
चाहे घर से लाओ या घर से बाहर
उसी दे भी नहीं रहा कोई उधार
वी फेल्ड ऐज़ ह्यूमन फिर एक बार
अब कुछ भी ना धर्म सब है यहां धंधा
उसने मालिक से ली 2 महीने की तनख्वा
वो लेकर गया हस्पताल पर इट्स टू लेट
उसकी माँ अब ना
दोष भी ठीक लगता है
दोस्त भी अब कहाँ मिलता है
कहीं भी ना जी लगता है
धोखा यह फ्री मिलता है
कोई ना नसीब लिखता है
कोई ना करीब दिखता है
किसीकी आवाज़ दब रही है
किसीका मकान टूट रहा है
दोष भी ठीक लगता है
दोस्त भी अब कहाँ मिलता है
कहीं भी ना जी लगता है
धोखा यह फ्री मिलता है
कोई ना नसीब लिखता है
कोई ना करीब दिखता है
किसीकी आवाज़ दब रही है
किसीका मकान टूट रहा है
Written by: Balbir

Loading...