album cover
Haasil
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Haasil was released on February 22, 2021 by rearts records as a part of the album Haasil - Single
February 22, 2021
Labelrearts records
BPM
Melodicness
Acousticness
Valence
Danceability
Energy

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Lyrics

कितनी ही नेमतों को किया मैंने अनदेखा
कितने अफसोस लेके अफसुर्दा बन बैठा
क्या हुआ जो अबू होगए दूर?
मुझे होना चाहिए फ़खर के मैं माँ का ग़रूर
के मैं मरहम हूँ जख्मों पे टूटे हुए दिल की
ये ताक़त भी सिर्फ़ रब के सब प्यारों को मिलती
के बिखरे वे लोग मेरे गीतों में अक्स देखें
झूम रही है रूह मेरी अर्श पे सब रक़्स देखें
सोचो वहां ऊपर भी क्या होगा समां
नुसरत साहब की आवाज़ बुल्ले शाह का क़लाम
जगित और ग़ालिब की भी होगी मुलाक़ात
एलिया साहब को भी मिलगए सब सवालों के जवाब
के कौन रहता है आसमान में
क्या रखा है टूटे सामान में
इस महफ़िल में इन सब में एक और शख्स होगा
वही जिसका नाम लेके आगे मैं हूँ चल रहा
जानता हूँ अबु आप ऊपर मुस्कुरा रहे
बेटा मेरे बता के वहां सब को जता रहे
फ़ैज़, जालिब, जिग्गर को भी मेरे गीत सुना रहे
मैं जानता हूं अबू आप अब भी मुस्कुरा रहे
फिक्कर नहीं करना आपका बेटा अभी ज़िंदा है
नाम आपका रहेगा ये आपसे मेरा वादा है
याद आया मेरे सुनने वाले का पेग़ाम
के मैंने अनजाने में बचाली उसकी जान
कैसे गीत मेरे उसके ग़मों के हुए साथी
कैसे वो भी अकेला नहीं दुनिया समझ पाती
और अगर तुम भी जो सुन रहे यही महसूस करते
ना रो मेरे प्यारे देखो ऐसे नहीं अफ़सोस करते
वादा है मेरा बदलेंगे हालात
ये वादा है तेरी कभी होगी ना मात
तू दिल का है सच्चा तू रूह का भी साफ है
ये दुनियावी मिट्टी जो उड़ रै आस पास
हम बदलेंगे, हमने कल को सवारना
हमने किसी का दिल में भी रखना उधार ना
ना होगा कोई दुश्मन ना दिलों में खोट होगा
जो भी नज़र आए, वो अपना ही दोस्त होगा
गले से लगा लो जो भी प्यारा तेरे साथ
जो साथ नहीं उनसे भी होगी मुलाक़ात
वो कहेंगे के फखर है तुम हार नहीं माने
परे दुनिया के ताने कहीं अपने बेगाने
है ईमान मेरा के सब रक्स एक होंगे
हरफ नहीं लड़ेंगे ना जुमलों के वैर होंगे
हर कोई मुहब्बत के गीत गुनगुनाएगा
दूर नहीं वो वक्त जब ऐसा दौर आएगा
के हट जाएंगी सरहदों से बैरियां रुकावटें
हम दोनों ही मुल्कों के लोग होंगे साथ में
ईद या दिवाली, रमज़ान या हो होली
ना होगी कभी खाली किसी बेबस की झोली
और जितने भी ख्वाब मुझे पता सब सच होने
मिलते हुए देखे मैंने शहरों के कोने
मैं छोटे से शहर का गुमनाम सा लड़का
जो सिर्फ अपने दिल की सब बातें तुमसे है करता
अगर उसके लफ्जों में तुम ख़ुद को देख पा रहे
फिर शायद कुछ भी नहीं जो इस दुनिया में ला हासिल
तू सबर रख, चलता रह, सर रख ऊँचा
मैं जानता तू दुख में तू ख़ुद से ही रूठा
ख़ुद को मना के मंज़िलें अभी भी बाक़ी
और तू नहीं है तन्हा हम सब तेरे साथी
हम जन्नत में साथ बैठे ख़ुद पे हसेंगे
के यूँही अफ़सुर्दा थे बेवजह की बातों पे
जानता हूँ मुश्किलें भी अब तक हैं साकिन
मैं जानता के तंग करे तुझे तेरा बातिन
इस लाइक डूबती हुई कश्ती को मिलजाएगा साहिल
यक़ीन रख
सब होजाएगा हासिल
Written by: Sunny Khan Durrani
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