album cover
Bigda Peeda
Hip-Hop
Bigda Peeda was released on June 19, 2024 by Shopolo Digital as a part of the album INDUSTRY
album cover
Release DateJune 19, 2024
LabelShopolo Digital
LanguageHindi
Melodicness
Acousticness
Valence
Danceability
Energy
BPM90

Credits

PERFORMING ARTISTS
Kausar XID
Kausar XID
Performer
COMPOSITION & LYRICS
Terry
Terry
Composer
Kausar Siddique
Kausar Siddique
Lyrics

Lyrics

हस्ती तस्वीरें हैं पर आखो मे उदासी साफ़
पीड़ा पापी है ये, खुदा इन्हें करदे माफ
रखते नियत गंदे, लेकिन इनके कपड़े साफ़
जो मैं सही नहीं तोह सही क्या है कहदे आप
दिल ये छोटा पड़ता, होता जितना बड़ा शहर
मैंने अमृत मांगा मगर मुझे मिला जहर
लिखा किनारो पे ग़म तुझसे पहले आई लहर
और जब ना आई लहर तुमने बोला करलो सहन
अपने पीड़े को बयान करदू ऐसे कि बड़े इन इमारतों में छोटे दिल वाले लोग
अपने पीड़े को बयान करदू ऐसे कि बड़े इन इमारतों में छोटी सोच वाले लोग
और इस पीड़े को पता ही होगा दर्द क्या
जब दर्द तोह पता ही होता उन्हें जो कि करते हैं फ़िक़्र
रिश्ते टूट ते ही बनते हैं अब घंटों में तोह
दिल में किसी शख्स का ना कभी रहता घंटा भी जिक्र
पीड़ा बिगड़ा है ये, दिलो में बाज़ार बने
मीठा पीड़ा है पर शब्दो में ओज़ार रखे
बिना खींचे इनके शांति में विवाद बने
देते तोड़ यू, ना रिश्ते का लिहाज़ करे
पीड़ा बिगड़ा है ये, नफ़रत के समाज में है
होता प्यार क्या चीज़ ना इनको समझ आए
इनका लक्ष ही ये पैसों पे आबाद रहे
अपने नज़रो मे तोह पीड़ा ये बर्बाद ही है
और ये इंटरनेट बस हेट ही फैलाता हैं
और मेरा बड़ा भाई एहसान नहीं गिनता हैं
बाकी मूर्ख सभी, लगे हैं दिखावे में
मिलें खुशी मुझे तभी अब वीरानें में
बर्बादियाँ ही हैं इनके इरादो में
चलते लोग ख़ुद शैतान के इशारो पे
क्या जवाब देंगे ये मैदान ए हश्रो पे
ये पीड़ा जहन्नुमी भरा तभी मसलों से
आज़ादी ज्यादा तभी लगते हैं ये क़ैद जैसे
शायरी से लेनी पीस मुझे फ़ैज़ जैसे
इसी ज़माने से मैं हु तुम्हे पता है ना, फिर भी ये जमाना अबतक नहीं है मुझमे जाएज़, बावे
हर एक ब्लेम डाले धर्म पे ये पर ये बर्बाद ही नहीं होते जो कि टीके रहते फ़र्ज़ पे ये
एल जनरेशन, आती मुश्किलें सजदो में नहीं डाउन होते हाई हैं ये चारसो पे
पीड़ा बिगड़ा है ये, दिलो में बाज़ार बने
मीठा पीड़ा है पर शब्दो में ओज़ार रखे
बिना खींचे इनके शांति में विवाद बने
देते तोड़ यू, ना रिश्ते का लिहाज़ करे
पीड़ा बिगड़ा है ये, नफ़रत के समाज में है
होता प्यार क्या चीज़ ना इनको समझ आए
इनका लक्ष ही ये पैसों पे आबाद रहे
अपने नज़रो मे तोह पीड़ा ये बर्बाद ही है
Written by: Kausar Siddique, Terry
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