album cover
Sharmindagi
album cover
Sharmindagi was released on February 6, 2026 by MARK BHATIA as a part of the album SHAFA - EP
February 6, 2026
LabelMARK BHATIA
BPM109
Melodicness
Acousticness
Valence
Danceability
Energy

Lyrics

Yeah, huh, oh
(Sounds like heaven)
आखिरकार केवल मिली मुझे शर्म जिंदगी
मुकम्मल ना हुई, आशिक़ की हवा हुई
आशिक़ की ढिल्ला, हाँ, हाँ, हाँ, हाँ
आखिरकार केवल मिली मुझे शर्म जिंदगी
भारी पड़ी मुझे दिल की लगी, मोहब्बत मेरी मुझसे खिलसी रही
चेहरा दिखे ना मैं खिलजी नहीं, फंसी पड़ी कहती उलझी नहीं
गुस्सा भरा मारी उल्टी नहीं, खुल के घुलती नहीं, घुल के जमती नहीं
जम ना चमके नहीं, झूमके चमके चमके तू ही नहीं
धन धन मांगे मांगे रूह ही नहीं, कोई कसूरी नहीं
जरूरी तेरी कोई मजबूरी रही वरना यूं ही नहीं
निकाल देता कुछ जेलुसी नहीं, अब होगी मुझसे कोई चापलूसी नहीं
पर आग आशिकी की बुझी नहीं, कुछ बूझे नहीं
पर ऐसा नहीं तुझे पूजे नहीं
सूजी आँखें तू जी जाके, तीजी ताज़े दर्दें बांधे फर्जी पर्दे
तरज़े गा के अर्ज़ी अरज़े रखे दर्जा पाने पर
जब सब ख़तम तब मैं ही दरिंदा, रात लगी मेरे दर जिंदगी
आखिरकार केवल मिली मुझे शर्म जिंदगी
मेरा मोह टूटा तुझसे मेरा अंग-संग दुखी
मैंने जीवन सारा ये अकेला है काटा, मैं जीवन सारा ये अकेला ही काटूं
बरकत प्यार वाली बरसे बरसों से ना बेवफा आशिक़ के तलवों को चाटूं
वो थूके मुझ पे वो मैं शर्मा समेटूं, फिर आईना देखूं और शर्मा के भागूं
लाहंत खाके मेरा पेट भरे, ना दलालत थामी पर मैं पानी ना मांगूं
आखिरकार केवल मिली मुझे शर्म जिंदगी
मेरा मोह टूटा तुझसे मेरा अंग-संग दुखी
आखिर, आखिर, आखिरकार केवल मिली मुझे शर्म जिंदगी
मेरा मोह टूटा तुझसे मेरा अंग-संग दुखी
मैंने जीवन सारा ये अकेला है काटा, मैं जीवन सारा ये अकेला ही काटूं
बरकत प्यार वाली बरसे बरसों से ना बेवफा आशिक़ के तलवों को चाटूं
वो थूके मुझ पे वो मैं शर्मा समेटूं, फिर आईना देखूं और शर्मा के भागूं
लाहंत खाके मेरा पेट भरे, ना दलालत थामी पर मैं पानी ना मांगूं
शर्म जिंदगी
शर्म जिंदगी
Written by: Mark Bhatia
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