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Jhoot
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Lyrics

Harmeeet, तुझे देखके पता है क्या लगता था
कि तू कुछ बहुत बड़ा करेगा
कितना potential है तुझ में
क्या हो गया है?
कु-कुछ बन क्यूँ नही पाया तू?
What happened?
मैं आदतों का मारा फिर बहाना दे गया
मेरा लाखों वाला गाना फिर से आधा रह गया
मैं बे-फ़िक्रियों में ऐसा बैठा रह गया
मकान सारा लुट गया और खाली ताला रह गया
मैं आदतों का मारा फिर बहाना दे गया
मेरा लाखों वाला गाना फिर से आधा रह गया
मैं बे-फ़िक्रियों में ऐसा बैठा रह गया
मकान सारा लुट गया और खाली ताला रह गया
फिर से झूठ कह दूँगा कि मेरे बस का नहीं था
या जब लूटा गया घर तब मैं घर पे नहीं था
But you know सच तो यही था, कि मैं घर पे ही था
और सब कुछ बस में भी था, बस मेरा मन सा नहीं था
मुझे वो घर ही नहीं पसंद, घर की वो घड़ी नहीं पसंद
घड़ी की छोटी सुई धीमी, मुझको बड़ी नहीं पसंद
ज़िंदगी अभी नहीं पसंद, मुझको तब थी नहीं पसंद
और आने वाली ज़िंदगी की मैंने रखी नहीं ख़बर
इतना बेख़बर अख़बारों में आग लग गई
और एक तो बेवजह ही घर वालों की आस लग गई
और चिंता तो मुझे भी थी आने वाले कल की
पर जब पेट भर गया तो मेरी आँख लग गई
और जाग, जागने में देर हो गई काफ़ी
फिर सोचा देर से शुरू करने से होगा क्या ही
फिर से मान लूँगा कि मेरे हक का नहीं था
फिर से झूठ कह दूँगा कि मेरे बस का नहीं था
तो तू अपना आलस छुपाने के लिए झूठ बोलेगा?
हाँ, झूठ में क्या बुराई है?
Hm, क्या बुराई है?
किसी सच्चे आदमी से पूछना
Hmm, सच्चा आदमी?
तुझे नहीं पता क्या?
क्या?
कि दुनिया में उतने ही सच्चे, जितने हैं झूठे अच्छे
झूठी क़समों से जानें जाएँगी, खाओ क़समें
"झूठ बोले कौवा काटे"
तो कम से कम मेरे झूठ कहने से
कौवा ना भूखा सोए जग में
लिखना सीखा तो सोचा किसी को सिखा भी दूँ
देखा ख्वाब तो सोचा किसी को दिखा भी दूँ
और ऐसा ना कि मैंने लिखा कभी सच नहीं
पर सच लिखा फिर सोचा कि सच को मिटा ही दूँ
क्योंकि सच्ची बातें कम ही लोग ही समझें
जैसे ये गाना झूठ पर, पर एक-एक बातें सच हैं
मुझे भी ज़्यादा कुछ परहेज़ तो ना भीगने से
पर कम से कम ये बादल एक-एक कर के बरसें
फिर ये ख्वाब सारा आधा रह गया
मैं हँस के ही उठा, भीगा सिरहाना रह गया
और सच इस साल सब कुछ पाने वाला था मैं, लेकिन
मैं आदतों का मारा फिर बहाना दे गया
मेरा लाखों वाला गाना फिर से आधा रह गया
मैं बे-फ़िक्रियों में ऐसा बैठा रह गया
मकान सारा लुट गया और खाली ताला रह गया
मैं आदतों का मारा फिर बहाना दे गया
मेरा लाखों वाला गाना फिर से आधा रह गया
मैं बे-फ़िक्रियों में ऐसा बैठा रह गया
मकान सारा लुट गया और खाली ताला रह गया
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Harmeeet on the mic
Writing what I feel
Written by: Aditya Pushkarna, harmeeet
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