album cover
The Void
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The Void adlı parça {albumName} albümünün bir parçası olarak REN tarafından 6 Mayıs 2023 tarihinde yayınlandıThe Void - Single
6 Mayıs 2023
FirmaREN
DilHintçe
BPM103
Melodiklik
Akustiklik
Valence
Dans Edilebilirlik
Enerji

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Şarkı sözleri

अपनी यादों में मुझको यूँ तुम तरसा ही देना
इतनी उम्मीदें देके, मुझसे छुपा ही लेना
फिर भी जो कम लगे तो चाहे सज़ा ही देना
फिर भी जो बचे थोड़ा प्यार बरसा ही देना
बरसा ही देना
तरसा ही देना
सज़ा ही देना
बरसा ही देना
तू छीन चुकी सारी ज़मीन
सात मेरे सुर सातो सही
आँखों में पानी जो वो अश्क़ नहीं
इसे बुलाता मैं तेरी कमी
अब ना रहा थोड़ा भी दम
लोगो को लगे हाथ में है रम
दिखे ना क्यूं तेरे दिए हुए ज़ख्म
मैंने सब भुला दिया रह गए बस तेरे ग़म
उस बरसात की एक बूंद है तू
अश्क़ो में खो ना जाऊँ आके ढूंढले तू
चाहे रूठ ले तू, शैतान का रूप ले तू
शैतान भी बोले क्या खूब है तू
क्या खूब बनाया मेरा मज़ाक
गलतियों की बात ना कर खामियां हज़ार
तेरा हर झूठ सुनने को बैठा बेक़रार
जवाब से दुगने रह गए मेरे पास ये सवाल
सवाल छोड़ बता कैसे हैं हालात
डन ओवरथिंकिंग अब तोह गुज़र चुके साल तेरे बिना
बैठा गुनगुनाता बस मेरे ये ताल
सुनाता तुम्हें पर तुम तो रहे भी ना
रहगुज़र बनचुके हो तुम
दुनिया के रंगो में ढल चुके हो तुम
बंद किताब थे खुल चुके हो तुम
अब क्या ही बोलू तुम हो चुके गुम
अपनी यादों में मुझको यूँ तुम तरसा ही देना
इतनी उम्मीदें देके, मुझसे छुपा ही लेना
फिर भी जो कम लगे तो चाहे सज़ा ही देना
फिर भी जो बचे थोड़ा प्यार बरसा ही देना
अपनी यादों में मुझको यूँ तुम तरसा ही देना
इतनी उम्मीदें देके, मुझसे छुपा ही लेना
फिर भी जो कम लगे तो चाहे सज़ा ही देना
फिर भी जो बचे थोड़ा प्यार बरसा ही देना
इतने गम दो के हंस भी ना पाऊँ
ज़िंदगी भर बैठा हिज्र की मैं रस्में निभाऊ
शहर ए दिल में मैं किस तरह उसको बसाऊ
उससे शिकायतें हैं, मैं भी रहता ख़ुद से खफा हूँ
ज़िंदगी फक्ड अप
तू भी रहती परेशान मैं नशे में यूँ फर्श पे पड़ा हूँ
यार देते रहे दिलासे, कैसे हाल समझाऊ उन्हें
कैसे हाल समझाऊं तुम्हें
आँखें बहुत मिली मेरी वफा के तमाशे के लिए
कंधे क़ाफ़ी थे जज़्बातों के जनाज़े के लिए
बस मान लो वह आए ही थे जाने के लिए
तुम्हें आईना दिखाने के लिए
बस मानलो के ज़िंदगी ये सहने का नाम है
वो पूछे लोकी कहां मर गया, मेरा जीना हराम है
हर एक लफ्ज पे दाम लगे ये अश्क जाते रायगां नहीं अब
मेरा सगा मेरा साया भी नहीं
क्यूं मुड़के तू आया भी नइ
घर की वीरानी रही चीखती
बहीर मैं करमे से आया भी नहीं
ना ज़्यादा भी मिला कुछ मुझे और कुछ गवाया भी नइ
ता उमर बस लड़ता रहा ख़ुद ही से
आखिर में हाथ कुछ आया भी नहीं
अपनी यादों में मुझको यूँ तुम तरसा ही देना
इतनी उम्मीदें देके, मुझसे छुपा ही लेना
फिर भी जो कम लगे तो चाहे सज़ा ही देना
फिर भी जो बचे थोड़ा प्यार बरसा ही देना
अपनी यादों में मुझको यूँ तुम तरसा ही देना
इतनी उम्मीदें देके, मुझसे छुपा ही लेना
फिर भी जो कम लगे तो चाहे सज़ा ही देना
फिर भी जो बचे थोड़ा प्यार बरसा ही देना
बरसा ही देना
तरसा ही देना
सज़ा ही देना
बरसा ही देना
Written by: Aryan Sharma, Syed Bilal

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