album cover
Arz-E-Niyaz
64
Indian Pop
Arz-E-Niyaz was released on July 14, 2022 by Berklee Indian Ensemble / Sony Music Entertainment India Pvt. Ltd. as a part of the album Shuruaat
album cover
Release DateJuly 14, 2022
LabelBerklee Indian Ensemble / Sony Music Entertainment India Pvt. Ltd.
Melodicness
Acousticness
Valence
Danceability
Energy
BPM75

Music Video

Music Video

Credits

PERFORMING ARTISTS
Berklee Indian Ensemble
Berklee Indian Ensemble
Performer
Vijay Prakash
Vijay Prakash
Performer
Sashank Navaladi
Sashank Navaladi
Performer
COMPOSITION & LYRICS
Sashank Navaladi
Sashank Navaladi
Composer
Mirza Ghalib
Mirza Ghalib
Lyrics
PRODUCTION & ENGINEERING
Sashank Navaladi
Sashank Navaladi
Producer
Annette Philip
Annette Philip
Producer

Lyrics

अर्ज़-ए-नियाज़-ए-इश्क़ के क़ाबिल ना रहा
जिस दिल पे नाज़ था मुझे, वो दिल नहीं रहा
जाता हूँ दाग़-ए-हसरत-ए-हस्ती लिए हुए
हूँ शम-ए-कुश्ता, दर-ख़ुर-ए-महफ़िल नहीं रहा
मरने की, ऐ दिल, और ही तदबीर कर कि मैं
शायान-ए-दस्त-ओ-बाज़ु-ए-क़ातिल नहीं रहा
अर्ज़-ए-नियाज़-ए-इश्क़
अर्ज़-ए-नियाज़-ए-इश्क़
अर्ज़-ए-नियाज़-ए-इश्क़
अर्ज़-ए-नियाज़-ए-इश्क़
(अर्ज़-ए-नियाज़-ए-इश्क़)
(अर्ज़-ए-नियाज़-ए-इश्क़)
(अर्ज़-ए-नियाज़-ए-इश्क़)
(अर्ज़-ए-नियाज़-ए-इश्क़)
बर-रु-ए-शश-जहत दर-ए-आईना बाज़ है
याँ इम्तियाज़-ए-नाक़िस-ओ-कामिल नहीं रहा
वा कर दिए हैं शौक़ ने बंद-ए-नक़ाब-ए-हुस्न
ग़ैर-अज़-निगाह अब कोई हाइल नहीं रहा
गो मैं रहा रहीन-ए-सितम-हा-ए-रोज़गार
लेकिन तेरे ख़याल से ग़ाफ़िल नहीं रहा
दिल से हवा-ए-किश्त-ए-वफ़ा मिट गई कि वाँ
हासिल सिवाए हसरत-ए-हासिल नहीं रहा
बेदाद-ए-इश्क़ से नहीं डरता, मगर, 'Asad'
जिस दिल पे नाज़ था मुझे वो दिल नहीं रहा
मरने की, ऐ दिल, और ही तदबीर कर कि मैं
शायान-ए-दस्त-ओ-बाज़ु-ए-क़ातिल नहीं रहा
वा कर दिए हैं शौक़ ने बंद-ए-नक़ाब-ए-हुस्न
ग़ैर-अज़-निगाह अब कोई हाइल नहीं रहा
गो मैं रहा रहीन-ए-सितम-हा-ए-रोज़गार
लेकिन तेरे ख़याल से ग़ाफ़िल नहीं रहा
ध-नी-सा-रे, ध-स-री-नि ध-प
प-द-स-नि-ध-प, म-प-ग-म-ग
रे-गा-मा-प, सा-ध-स-रे-नि-ध-प
म-प-स-नि-ध-प, म-प-म-ग
ग-म-प-ध-नि-नि, म-प-ध-नि-स-स, ध-नि-स-रे-ग-ग
नि-ग-म-प, ग-प-नि-स-नि-स, ध-नि-स
ध-नि-स-रे-ग, ग-स-रे-नि-ध-प
ग-म-प-ध-नि-सा, ध-नि-सा-प-म-ग-नि-सा
नि-ग-प-म-र-ग-म री-सा-री-सा-ध-नि-सा
बर-रु-ए-शश-जहत दर-ए-आईना बाज़ है (आईना बाज़ है)
याँ इम्तियाज़-ए-नाक़िस-ओ-कामिल नहीं रहा (कामिल नहीं रहा)
वा कर दिए हैं शौक़ ने बंद-ए-नक़ाब-ए-हुस्न
ग़ैर-अज़-निगाह अब कोई हाइल नहीं रहा
मरने की, ऐ दिल, और ही तदबीर कर कि मैं
शायान-ए-दस्त-ओ-बाज़ु-ए-क़ातिल नहीं रहा
अर्ज़-ए-नियाज़-ए-इश्क़
अर्ज़-ए-नियाज़-ए-इश्क़
अर्ज़-ए-नियाज़-ए-इश्क़
अर्ज़-ए-नियाज़-ए-इश्क़
अर्ज़-ए-नियाज़-ए-इश्क़
अर्ज़-ए-नियाज़-ए-इश्क़
अर्ज़-ए-नियाज़-ए-इश्क़
अर्ज़-ए-नियाज़-ए-इश्क़
(अर्ज़-ए-नियाज़-ए-इश्क़)
(अर्ज़-ए-नियाज़-ए-इश्क़)
(अर्ज़-ए-नियाज़-ए-इश्क़)
(अर्ज़-ए-नियाज़-ए-इश्क़)
(अर्ज़-ए-नियाज़-ए-इश्क़)
(अर्ज़-ए-नियाज़-ए-इश्क़)
(अर्ज़-ए-नियाज़-ए-इश्क़)
(अर्ज़-ए-नियाज़-ए-इश्क़)
Written by: Mirza Ghalib, Sashank Navaladi
instagramSharePathic_arrow_out􀆄 copy􀐅􀋲

Loading...