album cover
Vartmaan
115,760
Hip-Hop/Rap
Vartmaan was released on August 31, 2024 by UNIYAL as a part of the album Nanda Devi Express - EP
album cover
Release DateAugust 31, 2024
LabelUNIYAL
LanguageHindi
Melodicness
Acousticness
Valence
Danceability
Energy
BPM59

Music Video

Music Video

Credits

PERFORMING ARTISTS
UNIYAL
UNIYAL
Performer
Soumya rawat
Soumya rawat
Performer
COMPOSITION & LYRICS
Soumya rawat
Soumya rawat
Songwriter
UNIYAL
UNIYAL
Songwriter
PRODUCTION & ENGINEERING
Soumya rawat
Soumya rawat
Producer

Lyrics

[Intro]
(बबली के sweater से बुना गडरिया)
(गुड़िया के भीतर छुपा गडरिया)
(बबली के sweater से बुना गडरिया)
भेटाऊँ छू रे (Ayy ayy)
Ooh आछू (Huh hahaha!)
[Verse 1]
वर्तमान आँखों का धोखा है
भूत सीखने का मौका है
भविष्य उम्मीदों की नौका है
आज मेरा संगीत से रोका है
नाक पे चाँदी का कोका है
दिमाग में केवल अब
कुछ-न-कुछ बोलते रहना है
[Verse 2]
धरती एक माया नगरी है
हवस एक हवा का झोंका है
Criminal तो हर एक कोई होता है
Smack तो चोरी का मौका है
रायपुर में सिगरेट का खोखा है
होनी को कब किसने रोका है?
कहने को मुखबरी धोखा है
सा-सामान की तस्करी क्या है?
तुझे किसने कमाने से रोका है?
मेरे दिमाग में क्या है
मेरी माँ नहीं जानती मेरे phone को पता है
कल रात 9:30 बजे तीन रोटी खाई
ये Elon को पता है
(मेरे phone में जो echo आ रहा है)
डर के आगे जीत इज़्ज़त से बड़ा डर
ये Kim Jong को पता है
[Verse 3]
'हरे कृष्णा' का महत्व इस देश में क्या है
ये ISKCON को पता है
हम कीड़ा जड़ी उगाने वाले
आदिवासी जाने-माने हुड़के पे गाने वाले
मत लूटो हमको मैं हाथ जोड़ता हूँ
गोर-भैंस चराने वाले
घास लेके आने वाले बाल-बच्चे बेरोज़गार
मत लूटो हमको मैं हाथ जोड़ता हूँ
देवता नचाने वाले घुघुते पकाने वाले
अन्न उगाने वाले बाँट करके खाने वाले
रस्ते बनाने वाले हिमालय घुमाने वाले
मत लूटो मत लूटो
मत लूटो हमको मैं हाथ जोड़ता हूँ
[Verse 4]
(सही हो रखा है लेकिन)
(क्योंकि पहाड़ की कुछ भी आवाज़ नहीं आ रही है)
रस्ते से भटका था भीड़ से मैं डरता था
भाई से मैं लड़ता था लोगों पे हँसता था
मुझको तुम देखते थे क्या कभी ये लगता था
मीट मेरा झटका था उमर होगी सात-आठ
मच्छी का काँटा जाके गले मेरे अटका था
स्कूल पूरा रटता था
ग्यारहवीं में fail होते-होते बचा परीक्षा एक सट्टा था
नोट सारे बिखरे थे हाथों में कट्टा था
गाँव में मक्खन था गाँव में मठ्ठा था
मोज़े की बॉल थी हाथों में लट्ठा था
कंडाली में कूद मारी ज़ख़्मी हो सकता था
Written by: Soumya rawat, UNIYAL
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